मंजिल पाने के लिए नौकरी छोड़ कत्थक से रिश्ता जोड़ा : मंगला मुखी

मंजिल पाने के लिए नौकरी छोड़ कत्थक से रिश्ता जोड़ा : मंगला मुखी

प्राचीन कला केंद्र की ओर से ऑनलाइन वेब बैठक में धाैलपुर निवासी और भारत की एकमात्र ट्रांसजेंडर कत्थक नृत्यांगना देवेंद्र एस मंगला मुखी ने प्रस्तुति देकर सभी काे अपने कत्थक से माेहित किया। देवेंद्र एस मंगला मुखी ने बताया कि हम लाेग जिंदगी का सफर बेशक तय कर रहे हाेते हैं पर इस बीच हमें महसूस हाेता है कि इस राह पर चल ताे रहे हैं लेकिन जिस मंजिल पर जाना चाहते हैं उसका रास्ता ताे दूसरा है।

मुझे जब ये अहसास हुआ ताे मैंने जाॅब छाेड़ दी और अपना जीवन कत्थक के नाम कर दिया। वे 2016 से लगातार प्रस्तुति दे रही हैं। प्राचीन कला केंद्र की ओर से आयाेजित वेब बैठक में 15वें एपिसाेड कायर्क्रम में देवेंद्र हिस्सा बनीं ओर कत्थक किया। उन्हाेंने बताया कि बचपन से कत्थक की शिक्षा ली लेकिन प्रस्तुति नहीं दी थी। उस समय जेहन में था कि काॅरपाेरेट सेक्टर में जाना है।

इसके लिए पढाई की मुझे काॅरपाेरेट सेक्टर में जाॅब मिली। तीन साल तक काम करने के बाद जाॅब छाेड़ दी। वहां समय नहीं मिलता था कत्थक के लिए। बाद में कत्थक में ही अपना जीवन न्याेछावर करने का निणर्य लिया। उन्हाेंने कहा कि मंच बहुत जरुरी है में प्राचीन कला केंद्र का शुक्रगुजार हूं कि मुझे प्रस्तुति देने का माैका दिया।

मां लखनऊ की हैं। एक बार ननिहाल गई ताे वहां मां मुझे एक कार्यक्रम में ले गई। क्याेंकि मां का संगीत से लगाव था। जब मैंने वहां गुरु कपिला राज जी की प्रस्तुति देखी और इतनी प्रभावित हाे गई कि सीखने की इच्छा जाहिर हुई। शुरुआत मे टीचर से सीखा, बाद में गुर कपिला जी के यहां सीखने का माैका मिला।

ऐसा संस्थान बने, जहां ट्रांसजेंडर काे संगीत और नृत्य की निशुल्क शिक्षा मिल सके
ट्रांसजेंडर कत्थक नृत्यांगना देवेंद्र एस मंगला मुखी राजस्थान ट्रांसजेंडर वेलफेयर बाेर्ड की सदस्य रह चुकी हैं। अब उनकी चाहत है कि ट्रांसजेंडर का ग्रुप बनाऊं। ये ग्रुप कत्थक डांस की प्रस्तुति दे। इससे नेशनल इंटरनेशनल पर भी मंच मिल सके। साथ ही सरकार की मदद से यह भी चाहती हूं कि एक ऐसा संस्थान बनाया जाए जहां पर ट्रांसजेंडर काे संगीत, नृत्य की शिक्षा निशुल्क दी जाए।

ताकि सभी सम्मान से समाज में रह सकें और अपनी पहचान बना पाएं। प्राचीन कला केंद्र चंडीगढ़ की तरफ से उनकी 15वीं ऑनलाइन बैठक सीरीज में मैंने कत्थक की प्रस्तुति दी। कोरोना काल में कलाकारों के लिए ऑनलाइन प्रोग्राम्स की व्यवस्था की जा रही है जिससे कलाकार घर पर बैठकर ही अपने प्रोग्राम कर सकते हैं।