‘बोमा टेक्नीक’ से होगा ट्रैंस्लोकेशन:जंगलों का संतुलन बिठा टाइगर बचाने को पहली बार प्रदेश में एक से दूसरे जंगल ले जाएंगे सांभर व चीतल
पहली बार प्रदेश के एक से दूसरे जंगल में सांभर-चीतल जैसे शाकाहारी (हर्बिवरस) जीवों को स्थानांतरित (ट्रैंस्लोकेट) किया जाएगा। शुरुआत भरतपुर घना राष्ट्रीय उद्यान से करीब 300 किलोमीटर दूर बाघों के लिहाज से संकट में आए कोटा-मुकुंदरा से होगी। वन विभाग ने पहली कड़ी में 500 चीतल शिफ्ट करने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेज दिया है। अभी तक विभाग की ओर से जंतुआलयों जैसी जगहों में पले सांभर-चीतल को ही सीधे जंगल के सुपुर्द किया गया है।
अब मूलत: साउथ अफ्रीका और इसके बाद मध्यप्रदेश में अपनाई जा रही ‘बोमा टेक्नीक’ के जरिये इन शाकाहारी जीवों को शिफ्ट करने की प्लानिंग है। चूंकि राजस्थान के पास इस तरह का अनुभव नहीं रहा तो मध्यप्रदेश से ही इस काम में मदद ली जाएगी।
इसके लिए चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन मोहनलाल मीणा ने न केवल एमपी के वन विभाग को पत्र लिखा है, बल्कि वहां के पीसीसीएफ और दूसरे बैचमेट अधिकारियों से मदद के लिए निजी तौर पर दरख्वास्त भी लगाई है। मीणा ने उम्मीद जताई है कि इसी महीने एक बार उनके अधिकारी यहां ट्रेनिंग के लिए आएंगे। इसके बाद प्रदेश में भी इस तकनीक के जरिए पारिस्थितिकीय संतुलन बिठाने के लिहाज से खाली हुए जंगलों में चीलत कुलांचे भरेंगे।
इसी माह ट्रेनिंग के लिए आएगी एक्सपर्ट टीम
शाकाहारी जीवों को जंगल से बड़े एनक्लोजर और फिर उससे छोटे एनक्लोजर में लाकर इकट्ठा करना। फिर एक खास तरह के कैंटर-ट्रक (एक साथ तीन-चार ऐसे, जिसमें वन्यजीव को कम नुकसान पहुंचे) में लाते हुए शिफ्ट करना है। एमपी सरकार के पास ऐसे कैंटर और तकनीक का सफल अनुभव। मकसद वन्यजीव को कम से कम शॉक लगना।
- इसी माह एमपी के अधिकारियों को बुला ट्रैनिंग करा लेंगे। बजट आदि के प्रोविजन देख रहे हैं, कोशिश रहेगी कि एमपी से स्पेशल गाड़ी जैसी सुविधाएं ले सकें। डोनर भी ढूंढ रहे हैं। - मोहनलाल मीणा, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन


