15 साल की बेटी के जज्बे को सलाम पिता की सड़क हादसे में मौत के बाद मां ने मानसिक संतुलन खोया; 15 साल की बेटी फैक्ट्री शुरू कर चुका रही 19 लाख कर्ज

15 साल की बेटी के जज्बे को सलाम पिता की सड़क हादसे में मौत के बाद मां ने मानसिक संतुलन खोया; 15 साल की बेटी फैक्ट्री शुरू कर चुका रही 19 लाख कर्ज
पिछले साल सितंबर में हुआ था पिता का निधन, चार महीनों में चुका दिए 58 हजार रुपए

15 साल, यह वो उम्र होती है, जब बच्चे अपने कॅरियर के बारे में सोचना शुरू करते हैं। नए सपने बुनते हैं, लक्ष्य तय करते हैं, फिर उसी दिशा में आगे बढ़ना शुरू करते हैं। अब आपको 15 साल की रानी से मिलवाते हैं। पिता के जाने के बाद वह इस उम्र में न केवल छोटे भाई को पढ़ाने के साथ-साथ अपने परिवार को संभाल रही है, बल्कि पिता का 19 लाख रुपए का कर्ज भी चुका रही है।

इसके लिए उसने पिता की बंद फैक्ट्री को भी शुरू किया है। अब उसका एक ही सपना है कि खुद सफल व्यवसायी बनकर बैंक का कर्ज चुका अपने घर को मुक्त करवाना और छोटे भाई को अफसर बनाना। आप पूरी कहानी रानी से ही सुनिए...

रानी बोली, मेरा सपना- पापा का बिजनेस आगे बढ़ाना और छोटे भाई को बड़ा अफसर बनाना
मैं मम्मी व 9 साल के छोटे भाई के साथ रहती हूं। पापा सेल्समैन थे, पर मुझे आईएएस बनाना चाहते थे। मैं भी कलेक्टर बनने का सपना देखती थी। पर पिछले साल 16 सितंबर को पापा रवींद्र सोनी श्रीगंगानगर से बीकानेर एक मीटिंग के लिए रवाना हुए। सूरतगढ़ से पहले सेना छावनी के पास एक भीषण सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई। इसके बाद तो हमारे घर में कोहराम मच गया। मां पुष्पादेवी दिमागी संतुलन खो बैठी।

हमारे पास इतने पैसे भी नहीं थे कि पापा का अंतिम संस्कार कर सकें। तब नई धानमंडी के व्यापारियों, तपोवन ट्रस्ट व पापा के दोस्तों ने 15 हजार रुपए जमा करके दिए। इसके बाद कुछ दिन तो शांति से गुजरे, फिर धीरे-धीरे घर में रुपए मांगने वाले आना शुरू हुए। पहले तो हम समझ ही नहीं पाए। फिर पता लगा कि पापा ने घर बनाने के लिए कैनरा बैंक से 13 लाख, कारोबार के लिए बैंक से 5 लाख की लिमिट और करीब एक लाख रुपए लोगों से उधार लिए थे। कुल 19 लाख रुपए का कर्ज था।

...फिर फैक्ट्री शुरू कर इमली की गोलियां बनाने लगी
कुछ दिन बाद ही लाेग पैसे मांगने लगे। बैंककर्मी भी नोटिस दे गए, बोले कि किश्तें नहीं चुकाई तो घर सीज कर देंगे। पापा ने घर में ही छोटी फैक्ट्री लगा रखी थी, जिसमें वे इमली के चूर्ण व गाेलियां बनाकर सप्लाई करते थे। अक्टूबर 2021 में कुछ लोग मशीन ही ले जाने आ गए। तब तो हमने यहां पूर्व पार्षद सुरेंद्र स्वामी व स्थानीय लोगों का साथ लेकर मशीनरी नहीं ले जाने दी। फिर मैंने तय किया कि पापा की इस बंद पड़ी फैक्ट्री को मैं चलाऊंगी।