दोस्ती में दुखी होकर की खुदकुशी: दोस्तों के नाम लिखा; जिसके भरोसे जीना चाहा उसी ने ब्लॉक कर दिया, खदान में कूदा, युवक की मौत
शहर के सेंती सेगवा हाऊसिंग बोर्ड कालोनी निवासी एक युवक ने रविवार रात पानी भरी खदान में कूदकर आत्महत्या कर ली। मरने से पहले युवक ने बाकायदा अपने सोशल मीडिया स्टेटस पर कुछ मैसेज डाले। जिसमें उसने साफ लिखा की ये उसकी जिंदगी का आखिरी स्टेटस है। पुलिस कारणों का पता कर रही है।
सेंती में सेगवा हाऊसिंग बोर्ड काॅलोनी निवासी 27 वर्षीय जितेंद्रसिंह उर्फ जीतू पुत्र श्यामसिंह सोलंकी महाराणा पीजी कॉलेज के बाहर चाय की गुमटी चलाने के साथ ही पुताई का काम भी करता था। होली के दिन रविवार शाम वो सेंती में ही देवनारायण मंदिर के निकट पानी भरी खदान पर चला गया। कुछ क्षेत्रवासियों के अनुसार आखिरी बार उसके साथ एक-दो युवक और थे। देखते ही देखते जीतू खदान की दीवार पर खड़ा हो गया और अचानक पानी में कूद गया। मौजूद युवकों ने उसे बचाने का प्रयास भी किया पर सफल नहीं हुए।
सूचना के बाद सदर थानाधिकारी दर्शनसिंह, एसआई कसाना, एएसआई देवी मय जाब्ता पहुंचे। सिविल डिफेंस टीम के गोताखोर भी बुलाए गए। नगर परिषद सभापति संदीप शर्मा, पार्षद मुन्ना गुर्जर, भाजपा नगर अध्यक्ष सागर सोनीआदि भी मौके पर पहुंचे। शव को रात में ही पानी से बाहर निकालकर अस्पताल की मोर्चरी पर पहुंचाया गया। पुलिस ने पीएम करवाने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। हालांकि उसके आत्महत्या के कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुए पर नजदीकी लोगों के अनुसार वह कर्ज सहित विश्वासघात आदि कारणों से परेशान और निराशावादी हो चला था। सुसाइड स्टेटस मैसेज देखकर लगता है कि वो किसी के धोखे या बेरूखी से भी नाउम्मीद हो चला था।
चार संदेश डाले, जिनमें लिखा-उम्मीद और मेरा भरोसा टूट गया, आत्महत्या का समय भी लिख रखा था
खदान में कूदने से एक दो घंटे पहले जीतू ने अपने मोबाइल वाॅटसएप के स्टेटस में कुछ संदेश डाल रखे थे। हालांकि अधिकांश को इसका पता मौत की खबर सुनने के बाद चला। एक मैसेज में तो उसने बाकायदा समय सहित यह लिखा- मुझे जो लाइफ चािहए थी, वो मुझे नहीं मिली। इसलिए मैं तुम सबसे दूर जा रहा हूं, 7.30 बजे से। मुझसे कोई गलती हो तो मुझे माफ कर देना आप। जीतू का एक और संदेश था- मैंने जिसके भरोसे जिंदगी जीना चाहा, उसने मुझे आज ब्लॉक कर दिया है, इसलिए मुझे जीने का कोई हक नहीं है।
एक में लिखा मेरी उम्मीद और मेरा भरोसा टूट चुका है, इसलिए मुझे अब जीने का कोई हक नहीं। आखिरी व चौथे स्टेटस में लिखा कि ये जीतू का जिंदगी का आखरी स्टेटस है मेरे दोस्तों....। अभी यह साफ नहीं है कि उसके छलांग लगाते समय मौजूद कुछ युवक ये स्टेटस पढ़कर ही उसे बचाने पहुंचे थे या फिर वे अजनबी होकर पहले से मौजूद थे।
पत्नी व चार साल के बेटे को भी छोड़कर उठाया यह कदम...जीतू दो भाइयों में बड़ा था। कुछ साल पहले सेंती क्षेत्र में ही उसकी शादी हुई। उसके चार साल का बच्चा भी है। पिता व छोटा भाई सांवलियाजी चिकित्सालय गेट के बाहर सरस डेयरी बूथ संचालित करते हैं जबकि जीतू उनसे कुछ दूर ही कॉलेज के बाहर चाय की केबिन लगाता था। मिलनसार होकर रंगाई पुताई का काम भी करता था। इस तरह पिता, पत्नी, भाई व मासूम बेटे सहित परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा।


