कोरोना से लड़ना है, घर में रहना है: डरें नहीं, हिम्मत रखें; इस माह 626 ने हराया कोरोना, 72% घरों में ही रहकर हो रहे ठीक
दूसरी लहर में कोरोना तेजी से फैल जरूर रहा है। लेकिन, इससे डरें नहीं, बल्कि हिम्मत रखें। दूसरे शहरों की तुलना में हमारे यहां हालात काफी हद तक ठीक हैं। प्रदेश औसत 72.72 प्रतिशत के मुकाबले हमारी रिकवरी दर 90.09 प्रतिशत बनी हुई है। अब तक संक्रमित हुए 10739 में से 9675 लोग ठीक हो चुके हैं। इनमें 72 तो रविवार को ही घर लौटे हैं। इस दिन जिले में 935 एक्टिव केस थे। इनमें 267 लोग ही अस्पताल में भर्ती थे। 668 यानि 71.44 प्रतिशत लोग घरों में ही रहकर ठीक हो रहे हैं।
प्रदेश में सबसे कम एक्टिव केस वाला भरतपुर दूसरा जिला था। जबकि 912 एक्टिव केस के साथ झुंझुनू पहले नंबर पर रहा। जिला आरबीएम अस्पताल में फिलहाल ऑक्सीजन, बेड, वेंटीलेटर और इंजेक्शन का कोई बड़ा संकट नहीं है। ऑक्सीजन 2 दिन के लिए उपलब्ध है। एक टैंकर रिजर्व में है।
रेमडेसिविर इंजेक्शन भी एक दिन के लिए पर्याप्त हैं। जरूरत के मुताबिक बेड की व्यवस्था की जा रही है। आप धैर्य रखें, डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को सहयोग करें। इधर, करीब 5 दिन बाद रविवार को नए संक्रमित रोगियों का आंकड़ा 100 के नीचे रहा। इस दिन 99 रोगी मिले हैं। सीएमएचओ डा. कप्तान सिंह ने बताया कि अब तक 2 लाख 62 हजार 704 सैंपलों की जांच कराई जा चुकी है। वैक्सीनेशन का काम भी तेजी से चल रहा है। अब तक 3.50 लाख से ज्यादा लोगों को टीके लगाए जा चुके हैं।
जज्बा : इन्होंने हौंसले से हराया कोरोना, आप भी हिम्मत मत हारिए
फेफड़े 60% तक खराब हुए, अस्पताल में भर्ती रहे, कोरोना को हराकर लौटे
मुझे डायबिटीज है। मैं 11 अप्रैल को संक्रमित हुआ था। संक्रमण ने फेंफड़ों को 60 फीसदी तक खराब कर दिया था। आरबीएम में भर्ती हुआ। परिवार के लोग मुझे हिम्मत बंधाते रहे। बेटा रोज अस्पताल आकर खुद खाना खिलाकर जाता था। 3 दिन बाद जयपुर जाना पड़ा। लेकिन, मैंने तय कर लिया था कि चाहे कुछ भी हो, कोरोना को तो हराना ही है। यह आत्मविश्वास मेरे काम आया। जयपुर में 23 अप्रैल को मेरी रिपोर्ट नेगेटिव आ गई। लेकिन, फिलहाल मुझे कमजोरी है। अभी कोविड नियमों का पालन करते हुए घर पर हूं। लोगों से दूरी बनाए हुए हूं।
वैक्सीन की पहली डोज के बाद संक्रमित हुए, प्रोटोकॉल फॉलो किया, अब हैं ठीक
मैंने वैक्सीन की एक डोज लगवा ली थी। लेकिन, 26 मार्च को पॉजिटिव हो गया। आरबीएम अस्पताल में भर्ती रहा। क्योंकि घर पर परिजनों के भी संक्रमित होने का खतरा था। करीब 5 दिन बाद ही 30 मार्च को मेरी रिपोर्ट नेगेटिव आ गई। इस दौरान मैंने कोरोना प्रोटोकॉल पूरी तरह फॉलो किया। जैसे मुंह पर मास्क, दूसरे लोगों से दूरी और बार-बार हाथों को साबुन से धोना या सेनेटाइज करना। वैक्सीन से भी काफी फर्क पड़ा, क्योंकि संक्रमण गले से नीचे नहीं उतर पाया। मैंने ने दूसरी डोज भी लगवा ली है। अब बिल्कुल ठीक हूं।


