अफसरों ने नहीं दिया ध्यान रैंकिंग में फिर पिछड़ा भरतपुर, जनवरी में 6ठे स्थान पर था, अब 19वें पर
शिक्षा के मामले में भरतपुर की अब जैसी स्थिति शायद ही कभी रही हो। रैंकिंग लगातार गिर रही है। प्रदेश ही नहीं संभाग में भी फिसड्डी है। हाल ही जारी रैंकिंग में भरतपुर 11वें पायदान से खिसक कर 19वें पर आ गया है। शिक्षाविदों का कहना है कि विभागीय अफसरों की लापरवाही और अनदेखी की वजह से शिक्षा की क्वालिटी गिर रही है।
रैंकिंग गिरने की दूसरी वजह जिले में शिक्षा अधिकारियों के खाली पद नहीं भरना भी है। भरतपुर जिले के 10 में से सीबीईओ के 5 पद खाली हैं। इनमें कुम्हेर, डीग, कामां, रूपवास, बयाना में हैं। जहां सीबीईओ हैं, उनके पास वाहन नहीं हैं। इसलिए वे क्षेत्रीय स्कूलों में नहीं जा पा रहे हैं।
राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से जारी अप्रैल की रैंकिंग में भरतपुर जिले को 196.42 अंक मिले हैं। मार्च में 205.61 अंक के साथ जिला 11वें स्थान पर था। इस बार जयपुर सबसे अव्वल और बूंदी दूसरे स्थान पर है।
अजमेर जिला सबसे नीचे 33वें पायदान पर पहुंच गया है। संभाग में करौली भी 4 से 6ठे, धौलपुर 10वें से 16वें पायदान पर आया है। जबकि सवाई माधोपुर जिले की रैंकिंग सुधरी है। यह जिला 18वें से 16वें पायदान पर पहुंचा है।
जानिए... प्रदेश में कौन सा जिला कहां खड़ा है
जयपुर-1, बूंदी-2, चूरू-3, गंगानगर-4, हनुमानगढ़-5, करौली-6, पाली-7, दौसा-8, सीकर-9, उदयपुर-10, कोटा-11, सवाई माधोपुर-12, नागौर-13, झुंझनूं-14, टोंक-15, धौलपुर-16, अलवर-17, चित्तौड़गढ़-18, भरतपुर-19, डूंगरपुर-20, बाड़मेर-21, जोधपुर-22 सिरोही-23, भीलवाड़ा-24, बारां-25, प्रतापगढ़-26, बांसवाड़ा-27, बीकानेर-28, राजसमंद-29, झालावाड़-30, जालौर-31, जैसलमेर-32 और अजमेर-33 स्थान पर।

बोर्ड परीक्षाओं में व्यस्तता के कारण गिरी रैंकिंग : कुंतल
- बोर्ड परीक्षाओं में व्यस्तता की वजह से रिपोर्टिंग कम हुई है। इसलिए गिरावट आई है। अब सुधार के प्रयास किए जाएंगे। - प्रेम सिंह कुंतल, डीईओ भरतपुर
Satveer Choudhary 

