75 प्रजाति की तितलियां भरतपुर के केवलादेव में
जैव विविधता पोर्टल द्वारा चलाए जा रहे बिग बटरफ्लाई मंथ अभियान से इन दिनों तितलियां चर्चा में हैं। इसलिए जरा गौर से देखिए आपके आसपास इन दिनों 9 प्रजाति की हजारों तितलियां मंडरा रही हैं। इनकी खूबसूरती अलहदा है। ये आपको सुकून देंगी क्योंकि कोरोना के सात महीने में प्रदूषण कम हुआ है। तितलियों को सबसे अधिक संवेदनशील माना जाता है इसलिए इस माहौल में उनकी संख्या बढ़ना अथवा दिखना सुखद है।
केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी उद्यान में 75 प्रकार की तितलियां चिह्नित की जा चुकी हैं जो प्रदेश में मेवाड़ के बाद सबसे अधिक हैं। मेवाड-वागड़ क्षेत्र में 112 प्रकार की तितलियां पाई जाती हैं। इधर, केवलादेव घना में वनस्पति की विविधता है। केएनपी में 375 प्रजाति के पेड़-पौधे पाए जाते हैं, जिनमें कई दुर्लभ हैं। आरडी गर्ल्स कालेज के प्राचार्य एवं तितलियों पर रिसर्च कर चुके प्रो. एमएम त्रिगुणायत का कहना है कि सभी तितलियों का अपना होस्ट प्लांट होता है।
यानी वे अपने चिन्हित प्रजाति के पेड़-पौधों पर ही प्रजनन करती हैं। चूंकि केवलादेव घना में वनस्पति की विविधता है। इसलिए घना में 75 प्रकार की तितलियां पाई जा चुकी हैं। वैसे तो तितलियां का सीजन साल भर चलता है, लेकिन सितंबर से नवंबर मध्य तक भरतपुर में 9 प्रजाति की तितलियां बड़ी संख्या में दिखती हैं।
इनमें कॉमन गल, कॉमन क्रो, व्हाइट ओरेंज टिप, यलो ओरेंज टिप, सालमोन अर्ब, पायनियर, प्लेन टाइगर, ब्ल्यू पेजी और लाइम बटरफ्लाई आदि हैं। इनमें कामन क्रो विशेष श्रेणी में है। यानी यह विलुप्त होने के कगार पर हैं। पेड़-पौधों से घिरे आंगन, बाग-बगीचों में भी कॉमन क्रो ब्रीडिंग करती हैं। यह हमारे आसपास मंडरा रही हैं। केवल उन्हें निहारने और उनकी सुंदरता का अहसास करने की है।
8 प्रजाति की विशिष्ट श्रेणी की भी तितलियां : देश में 1641 प्रजाति की तितलियां पाई जाती हैं, जिनमें भरतपुर में 75 प्रकार की तितलियां मिलती हैं। तितली कॉमन क्रो, ग्रेट एग फ्लाई, स्ट्रिपेड अलवटरोस, कॉमन गल, कॉमन पीयर्ट, पीया ब्ल्यू, प्लेनस ब्ल्यू रॉयल, बेनडेड ऑल तितली विशिष्ट है। यह वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के तहत सूचीबद्ध हैं।
भास्कर नॉलेज... तेज दिमाग और लंबी उड़ान
तितली एकलिंगी प्राणी है। तितली का दिमाग बहुत तेज होता है। देखने, सूंघने, स्वाद चखने व उड़ने के अलावा जगह को पहचानने की इनमें अद्भुत क्षमता होती है। वयस्क होने पर आमतौर पर ये उस पौधे या पेड़ के तने पर वापस आती हैं, जहां इन्होंने अपना प्रारंभिक जीवन बिताया होता है। यानी तितलियां लंबी दूरी तक सफर करने में सक्षम होती हैं।
तितलियां का प्रजनन साल भर चलता है, लेकिन सबसे अधिक सितंबर में होता है। इसके अलावा फरवरी-मार्च में होता है। तितलियां शाकाहारी होती है, वो अपने जीवन भर फूलों का रस पीकर बड़ी होती है। इन्हें किसानों की मित्र, पराग कणों को ले जाने वाली सबसे बड़ी वाहक माना जाता है। पर्यावरण संतुलन में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। कुछ फूल विशेष रूप से तितलियों द्वारा परागित होते हैं।


