कॉफी

कॉफी
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कॉफी

#कॉफी  
#कॉफी
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कॉफी ट्री के बीजों को भूनकर कॉफी बनायी जाती है...कॉफी पेड़ ज्यादा ऊचे नहीं होते... ये विशेष रूप से बड़ी-बड़ी, हर झाड़ियाँ होती हैं जिनके पत्ते पत्ते और गहरे हरे रंग के होते हैं….. ये पेड़ ऐसे क्षेत्र में ही उगते हैं जहां न ज्यादा ठंड होती है ना ही ज्यादा गर्मी... जब इन आंखों पर पूरा बहर आ जाता है, तब ये खूबसूरत सफेद-सफेद फूल से भर जाते हैं, कुछ ही दिनों बाद इन फूलों से चेरी-समान, हरे-हरे बरसात के गुच्छे जो धीरे-धीरे बढ़ते जाते हैं और इसके साथ-साथ इनके रंग भी पाठमान होता है, इन साटन का रंग पहले हलका हरा होता है जो फिर गहरा हो जाता है, बाद में ये झटके-भूरे रंग के हो जाते हैं और पूरी तरह पक जाने पर लाल या पीले रंग के हो जाते हैं.... ।

दुनिया में लगभग 70 अलग-अलग मलबे के कॉफी के पेड़ होते हैं, कुछ पेड़ बह जाते हैं या क्षत-विक्षत हो जाते हैं तो कुछ 12 मीटर ऊंचा हो जाता है...इन सभी में से सिर्फ दो संकेत से ही दुनिया भर में 98 प्रतिशत कॉफी बनती है.. ये दो शेयर कॉफी एरिबिका या महज़ एरिबिका, और कॉफी कैनफोरा जिसे रोबस्टा भी कहा जाता है... सबसे अच्छी कॉफी अरबीका दुर्घटना से बनती है, खासकर उन कॉफी जाम से जो स्थानों पर उगते हैं... ।

भारत मे कॉफी की खेती ग्रामीण रूप से केरल,कर्नाटक वटकम में की जा रही हैं, अब इसकी खेती पूर्वी और उत्तर भारत के कुछ राज्यो में भी होने लगी है...,..।

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