राजस्थान के एक गांव में दो हजार लोगों पर सिर्फ एक कुआं, हर परिवार को 3 घड़े पानी मिलता है

राजस्थान के एक गांव में दो हजार लोगों पर सिर्फ एक कुआं, हर परिवार को 3 घड़े पानी मिलता है

भीलवाड़ा: एक तरफ लोग कोरोना जैसी महामारी से लड़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ इसके बाद बेरोजगारी जैसी समस्याएं भी बढ़ी हैं। इन समस्याओं के अलावा राजस्थान के एक कस्बे में बसे लोगों को पीने के पानी जैसी आधारभूत सुविधा के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है। राजसमंद जिले के हीरा का बड़िया गांव में करीब दो हजार लोग रहते हैं।

हीरा का बड़िया गांव आखिरी छाेर पर पहाड़ियाें में बसा है। यहां के हर व्यक्ति की सुबह दिनभर के पानी की चिंता में शुरू हाेती है। इसी चिंता में रात की नींद उड़ी रहती है। ऐसा काेई साल-दाे साल से नहीं। बरसाें से है। मानसून के दिन हैं इसलिए राहत सिर्फ इतनी है कि 50 फीट गहराई की बजाय कुएं में पानी ऊपर 10-15 फीट पर आ गया है।

गांव के युवा कुए में अंदर उतरकर सीढ़ीनुमा पत्थराें पर खड़े रहकर रस्सी से बंधे केन, बाल्टियाें में पानी भरते हैं।

बच्चे-बुजुर्ग, महिला-पुरुष सभी के दिन की शुरुआत पीने के पानी का इंतजाम कर लेने से हाेती है। कुएं पर भीड़ खूब हाे जाती है। कुछ युवा कुए में अंदर उतरकर सीढ़ीनुमा पत्थराें पर खड़े रहकर रस्सी से बंधे केन, बाल्टियाें में पानी भरते हैं, जाे महिलाएं और बच्चे रस्साें से ऊपर खींचते हैं।

ऐसा इसलिए कि काम कुछ जल्दी हाे जाए। पूरे साल एकमात्र कुआं ही सहारा है। जहां दाे-दो घंटे में नंबर आता है। पानी की राशनिंग की हुई है। एक परिवार काे गर्मी में दो-तीन घड़े ही पानी मिलता है।