जवाई परिसर में बनाया इंटरप्रीटेशन सेंटर, वन्यजीवों के पुतले बनाकर सजाए, जानकारी लेने पहुंच रहे पर्यटक

जवाई परिसर में बनाया इंटरप्रीटेशन सेंटर, वन्यजीवों के पुतले बनाकर सजाए, जानकारी लेने पहुंच रहे पर्यटक

जिले में भरपूर वन्य क्षेत्र व संपदा है। वन्यजीव भी कई तरह के हैं, लेकिन उचित संरक्षण के अभाव में कई वन्यजीवाें की संख्या धीरे-धीरे घटने लगी है। दो अभयारण्य व लेपर्ड संरक्षित क्षेत्र भी यहां है। बड़े-बड़े रंगीन पंखों वाले जंगली मुर्गे, लकड़बग्घे सहित कई किस्म के मोहक वन्यजीव भी है। अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट मानते हैं कि इनके सरंक्षण में गांव के लोगों की भूमिका अहम है।

सुमेरपुर, देसूरी, बाली, रोहट व सेंदड़ा में इन वन्यजीवों काे देखना काफी राेमांचकारी है। जवाई परिसर में बने इंटरप्रीटेशन सेंटर में रखे वन्य जीवों के मॉडल निहारने वालों की आवाजाही बढ़ रही है। पीओपी के बने ये मॉडल हूबहू असली होने का अहसास कराते हैं। इसके साथ ही वन्यजीवों की जानकारी भी मॉडल के साथ ही पास में लगाई गई है ताकि पर्यटक उस वन्यजीव के बारे में अच्छी तरह से जान सके।

समुद्री तल से 3500 फीट ऊंचा, जिले में 963.58 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है जंगल, विशेषज्ञ बोले- जवाई के आसपास वन्यजीव विविधता बेमिसाल

अरावली की पहाड़ियों से लेकर मैदानी भागों में 963.58 वर्ग किमी जंगल फैला है। इसमें से 817 वर्ग किमी आरक्षित और 143 वर्ग किमी सुरक्षित क्षेत्र है। रणकपुर और देसूरी नाल के आसपास जंगली मुर्गे व लकड़बग्घे फड़फड़ाते देखे जा सकते हैं।

सुमेरपुर, बाली की पहाड़ीयों के बीच भालू, लोमड़ी, चोसिंगा, लंगूर व लेपर्ड, चिंकारा, सांभर सहित कई वन्य जीव यहां प्रकृति को निखारते नजर आते हैं। रेंजर जवान सिंह ने बताया कि रोहट क्षेत्र में कूदते फांदते हिरणाें के दृश्य जहां मोहकता दर्शाते हैं, वहीं इनके सार-संभाल करने में जुटे लोगो की सेवा इनके प्रति सेवा भाव दर्शाती है।

इंटरप्रीटेशन सेंटर में रखे पीओपी से बने मॉडल

जवाई परिसर में बने जवाई इंटरप्रीटेशन सेंटर में दर्शकों की रुचि बढ़ी है। प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनाई मगरमच्छ, सारस व लेपर्ड के मॉडल मन मोह लेते हैं। साथ ही यहां वन्यजीव संपदा के बारे में भी लिखा हुआ है। अब तो यह वन्यजीव क्षेत्र पीएचडी शोध छात्रों, अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं के फाेटाे शूट का अच्छा स्पाॅट बन गया है।

यहां के गांवाें में अद‌्भुत मिसाल
यहां के गांव लेपर्ड के सुरक्षा और संरक्षण को लेकर लोगों के समर्पण भाव को दर्शाते हैं। यही वजह है कि लेपर्ड भी लोगों के साथ जीना सीख गया है। दुनियां में ऐसी अद्भुत मिसाल कम ही देखने को मिलती है। - वाल्मिक थापर, विख्यात वन्य जीव सरंक्षक