भारतवर्ष का पवित्र वृक्ष कृष्णवट .......!!
#कृष्णवट
भारत में एक बहुत ही पवित्र वृक्ष है जिसे हम कृष्णवट कहते हैं....
कृष्णवट भारत के कुछ भागों में पाये जाने वाले एक विशेष प्रकार के बरगद के वृक्ष को कहा जाता है.... इसके पत्ते मुड़े हुए होते हैं ये देखने में दोने के आकार के होते हैं... कृष्णवट के पत्तों में दूध, दही, मक्खन जैसे खाद्य पदार्थों का आसानी से सेवन किया जा सकता है....इसको कृष्णवट,कृष्णदोना या माखन कटोरी कहने के पीछे की कहानी भी श्री कृष्ण और उनके बचपन की बाललीलाओ से जुड़ी है....।
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वर्तमान समय में भी कई जगहों पर कृष्णवट का पेड़ देखने को मिलता है.... इनका आकार सामान्य बरगद से कुछ छोटा होता है... पश्चिम बंगाल में कृष्णवट कहीं-कहीं देखने को मिल जाता है... उत्तराखंड में देहरादून स्थित 'भारतीय वन्यजीव संस्थान' में भी कृष्णवट के कुछ वृक्ष हैं....आज भी इसका एक वृक्ष उत्तर प्रदेश के राज भवन में सरंक्षित है..... महानदी के किनारे शिवरीनारायण (छत्तीसगढ़)के मंदिर में भी यह पेड़ है जिसका विवरण Pran Chadha जी ने अपनी पोस्ट में किया है....ये पेड़ कुछ समय पूर्व राजस्थान के राजभवन में श्री कल्याण सिंह जी ने एक कृष्णवट का वृक्षारोपण कर इसके संरक्षण अभियान की शुरुआत की.....विज्ञान की मदद से अब यह पौधा नर्सरी वाले भी तैयार करने लगे हैं...।।
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कृष्णवट पर कुछ विदेशी वनस्पति शास्त्रियों ने शोध भी किया है। 1901 में कैंडोल ने इसका अध्ययन करने के बाद इसे सामान्य बरगद से अलग एक विशिष्ट जाति का वृक्ष माना और इसे कृष्ण के नाम पर वैज्ञानिक नाम दिया- '#फ़ाइकस_कृष्णीसी_द_कंदोल'
वही कुछ वैज्ञानिक इसे वटवृक्ष की ही प्रजाति मानते हैं..।
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