लाइब्रेरी, फर्नीचर, पेंटिंग व पौधे लगाकर दिया परिसर को नया स्वरूप, विद्यार्थी भी बढ़े; शिक्षक व भामाशाह अब तक 25 लाख कर चुके खर्च
अरावली की पहाड़ियों के पास बने इस विद्यालय का सौंदर्यीकरण देखकर प्राइवेट जैसा लगता है। प्रिंसिपल रजनी यादव ने बताया कि सबसे पहले विद्यालय का स्टाफ भामाशाह बना। एक लाख रुपए एकत्र कर काम शुरू करवाया। जिसे देख भामाशाह आगे आए और 1 साल में करीब 25 लाख रुपए का विकास कार्य करवाया। खंडहरनुमा व तबेले के रूप में दिखने वाला विद्यालय आज आसपास के क्षेत्र में मिसाल बना गया।

यहां भामाशाहों ने लाइब्रेरी, फर्नीचर, स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा, पेंटिंग, विद्यालय का रंग- रोगन, भूमि का समतलीकरण, छाया-फलदार पौधे, चारों तरफ तारबंदी सहित विभिन्न प्रकार का मूलभूत सुविधाओं का कार्य करवाया। अब जल्द ही विद्यालय का बड़ा गेट भी बनाया जाएगा।
यह स्टाफ भामाशाह
प्रिंसिपल रजनी यादव, शिक्षक मनोज कुमार मीणा, उदयवीर यादव, सुरेंद्र कुमार, ओमप्रकाश यादव, मुकेश सिंह, वीरेंद्र यादव, मीना यादव, संजय कुमार, मून यादव, निशा सिंह, पूरणमल मीणा, बबली देवी ने 1 लाख से विकास शुरू करवाया।
धूमीराम ने दान की जमीन
इस गांव के सबसे बड़े भामाशाह धूमीराम और उनका परिवार है। उन्होंने 147 एयर जमीन को स्कूल के नाम दानकर दिया। जिस पर विद्यालय का भवन खड़ा होने के साथ ही अन्य सुविधाएं बनी हुई हैं। इसके साथ खेल मैदान है, जो बच्चों का भविष्य संवारने के काम आएगा।

206 विद्यार्थी अध्ययनरत
सन 1954 में प्राथमिक से खुला यह विद्यालय 1985 में उच्च प्राथमिक बना, 2010 में सेकेंडरी ओर 2018 में हाई सेकेंडरी बना। यहां 206 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिसमें 97 छात्र और 109 छात्राएं हैं। यहां प्रिंसिपल सहित 13 का स्टाफ है। हालांकि प्राथमिक कक्षाओं में 4 स्टाफ कम पड़ रहा है। गांव सिरयानी, चक नंबर 1, 2, 3 के विद्यार्थी यहां पढ़ाई के लिए आते हैं।
महापुरुषों के नाम पर बनाए कमरे
विद्यालय के 10 कमरे सभी महापुरुषों के नाम है। खेल मैदान, छाया और फलदार पौधे, वाटर कूलर, सीमेंटेड बेंच, इंटरलॉकिंग प्रार्थना स्थल, आधुनिक छात्र-छात्राओं के लिए शौचालय, 25 कंप्यूटर के संग लैब, लाइब्रेरी, साइकिल स्टैंड, स्वच्छ पेयजल सुविधा, बाला पेंटिंग, सभी कमरों में पंखे, इनवर्टर की सुविधा, खेल-खेल में शिक्षा के साथ अब जल्द ही बड़ा मुख्य द्वार आकर्षण का केंद्र बनेगा।
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