फाइनेंस कंपनी के मालिक ने की धोखाधड़ी 15 साल बाद गारंटर के गांव के पते पर 26 मार्च को 3 करोड़ रिकवरी का नोटिस आया तब भांडा फूटा

फाइनेंस कंपनी के मालिक ने की धोखाधड़ी 15 साल बाद गारंटर के गांव के पते पर 26 मार्च को 3 करोड़ रिकवरी का नोटिस आया तब भांडा फूटा
फाइनेंस कंपनी के मालिक ने लोन उठाकर की धोखाधड़ी।

जिस फाइनेंस कंपनी ने करीब 15 साल पहले एक व्यक्ति का बस के लिए 40 लाख रुपए का लोन खारिज कर दिया और दस्तावेज नहीं लौटाए, उसी कंपनी के मालिक ने धोखाधड़ी करते हुए उस व्यक्ति के नाम से लोन उठा लिया।

ऋणी और गारंटर के गलत पते भर कर लोन तो उठा लिया, मगर 15 साल बाद गारंटर के गांव के पते पर 26 मार्च को जब 3 करोड़ रुपए की रिकवरी का नोटिस आया तब इस धोखाधड़ी का भांडा फूटा।

गारंटर ने शास्त्री नगर थाने में फाइनेंस कंपनी के मालिक और कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज करवाया। पुलिस ने कंपनी के मालिक सहित 6 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

फरियादी व गारंटर अशोक जैन निवासी रामेश्वर नगर बासनी ने बताया कि गुजरात के हिम्मत नगर में रहने वाले दोस्त हाथी भाई पटेल बस खरीदना चाहते थे। गारंटर के रूप में अशोक अपने दोस्त हाथी भाई के साथ लोन दिलाने के लिए तारा ऑटो फाइनेंस कंपनी के मालिक दिनेश देशलहरा से मिले।

दिनेश ने श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी से लोन दिलाने का कहकर दस्तावेज जमा करवाए। इस दौरान दिनेश ने श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी के अधिकारी उमेश गोविंद रेवनकर, पी श्रीधर, गणेश, राजीव और बाला सुब्रह्मण्यम से मिलवाया और 15 दिन में फाइनेंस कराने का कहा। 25 दिन बाद भी जब लोन स्वीकृत नहीं हुआ तो दिनेश से दस्तावेज वापस मांगे तो उसने बताया कि लोन कैंसिल हो जाने पर दस्तावेज वापस नहीं मिलते हैं।

पिछले महीने 26 मार्च को गारंटर अशोक को गांव के पते पर वकील का नोटिस मिला, जिससे पता चला कि उनके दोस्त हाथी भाई के नाम पर 40 लाख रुपए का लोन अगस्त 2007 में ही उठा लिया गया है। इस लोन में गारंटर उन्हें बनाया गया है। लोन लेने के बाद किस्त नहीं भरी गई, जिसकी तीन करोड़ रुपए रिकवरी निकाली गई।

इस तरह पूरा फर्जीवाड़े का पता चला। पुलिस ने तारा ऑटो फाइनेंस एजेंसी के मालिक दिनेश, श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी के अधिकारी उमेश गोविंद रेवनकर, पी श्रीधर, गणेश, राजीव और बाला सुब्रह्मण्यम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।