पहली बार पकड़ा फर्जी सिम बेचने वाला गिरोह

पहली बार पकड़ा फर्जी सिम बेचने वाला गिरोह

अगर आप बाजार में केनोपी लगाकर बैठे लोगों से मोबाइल सिम खरीद रहे हैं तो सावधान हो जाएं। आपके नाम पर कभी भी ओएलएक्स पर ऑनलाइन ठगी हो सकती है। जी हां, भरतपुर पुलिस ने मेवात के ठगों को फर्जी नामों की एक्टिवेट सिम बेचने वाला गिरोह के 15 बदमाशों को पकड़ा है।

ये लोग नई सिम खरीदने वाले लोगों से उनके आधार कार्ड, राशनकार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस आदि दस्तावेज लेकर पहले उन्हें सिम जारी कर देते थे। बाद में उनके इन दस्तावेजों में नाम-पते आदि में मामूली फेरबदल कर फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन पर दूसरी सिम एक्टिवेट कर लेते थे। बाद में वे यह सिम मेवात के ऑनलाइन ठगों को 2000 रुपए तक में बेच देते थे।

एसपी डॉ. अमनदीप सिंह कपूर ने बताया शुक्रवार को यहां मीडिया को बताया कि पकड़े गए बदमाशों में जयपुर के शाहपुरा निवासी रमेश स्वामी (24) और विराट नगर निवासी विक्रम गुर्जर (25) मास्टर माइंड हैं। गिरोह के कब्जे से 2 कार, 5 बाइक, 111 सिम, 27 मोबाइल, 1 लेपटॉप, 11 बैंक पास बुक, 12 एटीएम कार्ड, 2 चैक बुक और 2 पेटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं। इनसे पूछताछ में और कुछ और बड़े खुलासे होने की संभावना है। इनसे यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि जयपुर जिले के अलावा और किन-किन क्षेत्रों में इस तरह फर्जी नाम से सिम बेची जा रही हैं।

सीकरी और कामां के हैं ज्यादातर ठग
राडावास (शाहपुरा) निवासी रमेश स्वामी (24), पनदो (विराट नगर) निवासी विक्रम (25) नियमावास (सीकरी) निवासी अरसद मेव (30), मुनफैद मेव (21), आरिफ मेव (25), सीकरी निवासी इलियास मेव (55), अकबरपुर वास (सीकरी) अख्तर मेव (50), इंसाद मेव(26), फजरूद्दीन मेव(28), जाहल हक मेव (33), लालपुर (कामां) निवासी अशफाक मेव (21), नासिर मेव (20), सद्दाम हुसैन मेव(25), धर्मशाला (कैथवाड़ा) जाहल मेव (35) और खालिद मेव (25) हैं।
बदमाश ऐसे करते थे ऑनलाइन ठगी
ये बदमाश ऑनलाइन ठगी के लिए अक्सर राजस्थान के बाहर दूसरे प्रदेशों को चुनते थे। वहां ओएलएक्स पर कार, स्कूटी, बाइक, मोबाइल, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बहुत कम कीमत पर बेचने का विज्ञापन डालते हैं। ग्राहक को भरोसा दिलाने के लिए सामान की डिटेल के साथ ही सेना के अधिकारी-जवानों के फोटो लगी आईडी डालते थे। जबकि मोबाइल और वाट्सएप नंबर अपना ही डालते हैं।

वाट्सएप चैटिंग के माध्यम से ग्राहकों को पहले अपने जाल में फंसाते हैं। फिर उनसे बतौर एडवांस कुछ राशि फोन-पे, गूगल-पे, पेटीएम. नेट बैकिंग, एनईएफटी, आरटीजीएस आदि के माध्यम से ऑनलाइन बैंक खातों में ट्रांसफर करवाकर फोन बंद कर लेते थे। ये बदमाश जिन खातों में ठगी की रकम डलवाते थे, वे भी जन-धन अथवा जीरो बैलेंस वाले खाते होते हैं।

मेवात क्षेत्र के ही एक युवक ने दिया था कागजों में काट-छांट करने का आइडिया
एसपी डॉ. अमनदीप सिंह कपूर ने बताया कि रमेश और विक्रम दोनों ही एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया कंपनियों के सिम रिटेलर रह चुके हैं। ये दोनों जयपुर जिले के शाहपुरा, मनोहरपुर, विराट नगर आदि कस्बाई बाजारों में अपने लड़के भेजकर केनोपी लगाकर सिम बिकवाते थे। इसी दौरान इन दोनों की अलवर के मेवात में रहने वाले एक युवक से जान-पहचान हो गई। उसी ने इन्हें कागजों में हेराफेरी करके दूसरी सिम एक्टिवेट करने का आइडिया दिया था।

इसके बाद ये लोग कागजों में कांट-छांट करके जाली दस्तावेज तैयार कर दूसरी सिम एक्टिवेट करके बेचने लगे। ऑनलाइन ठग पकड़े जाते थे तो उनके द्वारा उपयोग किए गए वाट्सएप, मोबाइल कॉल की तहकीकात के लिए मोबाइल कंपनियों को उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की जांच के लिए पुलिस जब सिम धारक के पतों पर पहुंचती तो वहां उस नाम का कोई व्यक्ति नहीं मिलता था। इससे पता चला कि कागजों में हेराफेरी करके दूसरी सिम बेची जा रही हैं। इस गिरोह को पकड़ने के लिए पुलिस कर्मियों ने मेवात इलाके में कई माह तक रैकी और गहन पड़ताल की। कुछ पुलिस कर्मियों को ओएलएक्स पर फर्जी ग्राहक भी बनना पड़ा।