हादसे के बाद वीडियो न बनाए घायल की मदद करें और अस्पताल पहुंचाए, यही मानव धर्म
प्रादेशिक परिवहन कार्यालय में स्वयंसेवी संस्था सहायता ग्रुप की ओर से परिवहन विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों को रोड सेफ्टी को लेकर बेसिक लाइव सेविंग प्रशिक्षण दिया गया। इसमें बाइक चलाते समय हेलमेट पहनने और चौपहिया वाहन चलाते समय सीट बेल्ट बांधने के तरीके के बारे में बताया। इसके अलावा रास्ते में दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करने संबंधी बातें बताईं गई। प्रशिक्षकों ने हादसे के बाद अक्सर लोग वीडियो बनाते हैं और दुर्घटना करने वाले वाहन के चालक से मारपीट करते हैं। ऐसा न करने के बजाए घायलों को अस्पताल पहुंचाए। यही मानव धर्म हैं।
ऑनलाइन प्रशिक्षण दे रहे प्रशिक्षकों ने बताया कि यातायात नियम जानने के बाद भी अधिकांश वाहन चालक उनका पालन नहीं करते है। यह चिंतनीय है। छोटे-छोटे नियम बड़े हादसों को टालने में काम आते हैैं। हेलमेट न पहनना और सीटबेल्ट न लगाना हादसों में मौतों की बड़ी वजह है। अक्सर बाइक सवार हेलमेट तो पहन लेते हैं, लेकिन बेल्ट नहीं बांधते हैं। हादसे के दौरान वाहनों के टकराने के बाद हेलमेट खुलकर गिर जाता है, जिससे सिर में गंभीर चोट लगती है और चालक गंभीर घायल हो जाता है।
अक्सर ऐसे मामले भी सामने आते हैं कि चालक ने हेलमेट नहीं पहना होता है। इसके अलावा कुछ बाइकर्स हेलमेट सिर्फ चालान के डर से बचने के लिए ही पहनते हैं। टू व्हीलर चलाते समय यदि आपने हेलमेट लगाया हुआ है, तो यह आपकी आंखों की सेहत के लिए भी ठीक है। हेलमेट पहना हुआ व्यक्ति अपने आसपास की चीजों पर ध्यान नहीं देता है। वह केवल ड्राइविंग पर ही फोकस करता है। सस्ते हेलमेट सिर को प्रोटेक्ट नहीं करते हैं। अलबत्ता से इससे आपको चोट लगने की संभावना बढ़ जाती है। ये जरा से दबाव से ही टूट जाते हैं। आईएसआई मार्का वाले हेलमेट मजबूत होते हैं, जो दुर्घटना के समय सिर की सुरक्षा करते ।
इलाज नहीं करने वाले अस्पताल पर हो सकता है मुकदमा
सामान्यतया लोगों में धारणा बनी हुई है कि घायलों काे अस्पताल पहुंचाने पर पुलिस परेशान करेगी तथा अस्पताल में भी कई तरह के सवालों के जवाब देने पड़ेंगे। लेकिन यह सच नहीं है। सुप्रीम काेर्ट ने इस संबंध में स्पष्ट आदेश है कि घायलों की मदद करने वालाें से पुलिस पूछताछ नहीं करेगी। दूसरा हादसों में घायलों काे नजदीक के किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में भर्ती करवाया जा सकेगा। निजी अस्पताल में इलाज के लिए काेई पैसाें की मांग नहीं करेगा।
अगर निजी अस्पताल प्रबंधन इलाज में देरी करता है। इस दाैरान घायल की जान चली जाती है अथवा अंगभंग की स्थिति बनती है ताे अस्पताल प्रबंधन पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा। सड़क हादसे में घायल के लिए शुरूआती आधा घंटा बहुत अधिक महत्वपूर्ण हाेता है।
इस अवधि में मदद मिल जाए ताे 90 फीसदी चांस हाेते हैं कि मरीज काे बचाया जा सकेगा। अब सीएम ने घायलों की मदद करने वालाें काे 5 हजार के पुरस्कार की घोषणा भी कर दी है। प्रशिक्षण के दौरान प्रादेशिक परिवहन अधिकारी सतीश कुमार, डीटीओ संजय शर्मा, ललिता सैनी, मानवेंद्र सिंह, चंद्रपाल सिंह, मनोज सिंघल, महक सिंह आदि मौजूद रहे।


