राजस्थान-हरियाणा सीमा से ग्राउंड रिपोर्ट:चुनाव में किसान भगवान, अभी हरियाणा बॉर्डर में गए तो लाठी, राजस्थान में साथी

राजस्थान-हरियाणा सीमा से ग्राउंड रिपोर्ट:चुनाव में किसान भगवान, अभी हरियाणा बॉर्डर में गए तो लाठी, राजस्थान में साथी

*शाहजहांपुर पर राजस्थान-हरियाणा सीमा है, दिशा बदलते ही सरकारों के लिए चेहेरे और कानून बदल रहे हैं

*राजस्थान की ओर से किसानों की समस्या जानने संभागीय आयुक्त समित शर्मा पहुंचे 

शाहजहांपुर बाॅर्डर पर जहां किसानों का आंदोलन चल रहा है, वहां सत्ता के दो चेहरे भी नजर आ रहे हैं। तीन कदम दिल्ली की ओर बढ़े तो पुलिस हाथ में डंडा लिए, बड़े पत्थरों व डंपरों, ट्रकों से रास्ता रोके हुए किसानों को धकियाते नजर आएगी, वहीं तीन कदम जयपुर वाले रोड पर बढ़े तो ऐसा लगेगा कि पुलिस सहित प्रशासन के अधिकारी आपके स्वागत में खड़े हैं।

यह अंतर केवल इसलिए है कि हरियाणा में सत्ता भाजपा की है और राजस्थान में कांग्रेस की। सभाओं में दोनों पार्टियों के लिए किसान भगवान होते हैं, किसान की खुशहाली के बिना भाषण पूरा नहीं होता पर यहां दोनों आमने-सामने हैं। शुक्रवार को संभागीय आयुक्त समित शर्मा ने किसानों से बातचीत की। जयपुर दिल्ली नेशनल हाईवे का यह स्थान आंदोलन से पहले हजारों वाहनों का बोझ झेलता था, अब यहां इन सभी पर रोक है। सड़क पर करीब दो किमी तक किसानों के ठहरने के तम्बू लगे हैं। आसपास रसोई है। खाना खाते लोग नजर आते हैं तो केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाती टीम। एक डिग्री तापमान में भी किसान के तेवर में कोई कमी नहीं है।

कहते हैं हम इसी मिट्टी के बने हैं, हम लड़ने आए हैं तो जीतकर ही जाएंगे। यहां पर राजस्थान के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा व मध्यप्रदेश के हजारों किसान मौजूद हैं। कुछ ने पिछले 28 दिनाें से डेरा डाला हुआ है तो कुछ 2-3 दिन के लिए आते और चले जाते हैं, वे अपने परिवार के दूसरे सदस्य को भेज देते हैं।

आंदोलन का बैनर संयुक्त किसान मोर्चा है। दावा है कि इसमें 502 संगठन शामिल है। यूं तो यहां पर राजनीतिक दलों के नेताओं का आना जाना चल रहा है लेकिन किसी को भी पार्टी के बैनर के साथ आने पर रोक है। अगर किसान के हित की बात करनी है, तो सामने बिछी जाजम पर बैठ सकता है।

राजस्थान और हरियाणा बार्डर पर कैसा है दो सरकारों का हाल

राजस्थान - पडाव में एसडीएम कैंप करेंगे

जयपुर के संभागीय आयुक्त डॉ. समित शर्मा शुक्रवार को एनएच-48 पर 28 दिन से चल रहे किसान पड़ाव में पहुंचे। किसानों ने आंदोलन स्थल पर पेयजल- शौचालय आदि की बदइंतजामी की शिकायत की। संभागीय आयुक्त ने इसके लिए खेद जताते हुए नीमराना एसडीएम, भिवाडी नप आयुक्त और नीमराना तहसीलदार को पड़ाव स्थल पर कैंप करने के निर्देश दिए।

किसानों से बातचीत के बाद वे वापस लौट गए। संभागीय आयुक्त ने किसानों की समस्या सुनने के बाद नीमराणा एसडीएम योगेश देवल एवं भिवाडी नगर परिषद के आयुक्त मुकेश शर्मा को दिन के समय और नीमराणा तहसीलदार रमेश जोशी को रात के समय कैंप करने के निर्देश दिए।

हरियाणा - यहां पुलिस का सख्त इंतजाम

यहां दाे राज्यों की सीमा है और दोनों राज्यों में सरकारें अलग-अलग पार्टी की हैं। इसलिए पुलिस व अफसरों का चेहरा पूरी तरह अलग नजर आता है। इसे मानवीयता कहें, सरकार की जिम्मेदारी या कुछ भी, पर राजस्थान सरकार ने इस तरह की व्यवस्था की हुई है कि किसानों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

यानी अगर कोई बीमार है तो सरकारी एंबुलेंस खड़ी है, टॉयलेट के लिए नगर परिषदों की चल टॉयलेट वाली गाडिय़ां हैं, सफाई के लिए अस्सी किलोमीटर दूर यानी अलवर नगर परिषद तक से ऑटो टिप्पर लगे हुए हैं। किसानों के टैंट में पानी की सप्लाई के लिए रीको की गाड़ी नियमित पहुंच रही है। खाने की व्यवस्था संगठनों ने अपने स्तर पर की हुई है।

किसानों ने बताई अपनी आपबीती

टैंट में आराम कर रहे सीकर के किसान प्रकाश का कहना है वह साथियों के साथ पिछले 20 दिन से आंदोलन में है। कुछ साथी चले जाते हैं, उनकी जगह दूसरे आ जाते हैं। जब तक मांगे नहीं मानी जाएगी यहीं डटे रहेंगे।

टैंट में आराम कर रहे सीकर के किसान प्रकाश का कहना है वह साथियों के साथ पिछले 20 दिन से आंदोलन में है। कुछ साथी चले जाते हैं, उनकी जगह दूसरे आ जाते हैं। जब तक मांगे नहीं मानी जाएगी यहीं डटे रहेंगे।

टैंटों के बाहर हाड़ कंपाने वाली सर्दी से बचाव के लिए किसानों ने अलाव जलाए हुए हैं। अलाव के सहारे बैठे हरियाणा के भिवानी जिले के वीराणा गांव के किसान रामेश्वर ने हुक्के का लंबा कश खींचते हुए कहा जब तक मांग नहीं मानी जाएगी, घर वापसी का सवाल ही नहीं उठता। गांव से वे 13 दिसंबर को आंदोलन में शामिल हाेने पहुंचे थे, तब से घर नहीं गए। कल रात को भी 11 ट्रैक्टर आए हैं।

महाराष्ट्र से आए किसान ओमकार खाली समय में टैंट के अंदर आंदालेन से संबंधित किताब पढ़ते हुए बताता है कि वह लॉ की पढ़ाई कर रहा है। किसान आंदोलन को समर्थन देने के लिए साथियों के साथ आए हैं। उनका कहना है कि पढ़ेंगे भी और किसानों के लिए लड़ेंगे भी। लॉ करने के बाद भी आंदोलन के लिए लड़ते रहेंगे। आंदोलन और पढ़ाई दोनो देश सेवा है।

आंदोलन स्थल पर दिल्ली एम्स से एमबीबीएस कर रहे गुजरात के वडोदरा निवासी अंकुश सिद्ध सहित कई युवा किसानों के हक की लड़ाई और पढ़ाई साथ कर रहे हैं। अंकुश ने बताया कि उसके पिता हरफूल किसान हैं। उन्हें किसानों के दर्द का अहसास है। इसलिए संघर्ष में जुड़े हैं। सीकर के बीटेक छात्र विशाल चौधरी एस‌एफ‌आई के सक्रिय सदस्य हैं।

नेशनल हाईवे पर मेले जैसा नजारा

यूं तो यह नेशनल हाईवे है, लेकिन यहां का नजारा आजकल उन मेलों जैसा है जिनमें सैकड़ों आयोजक होते हैं और वे लोग वहीं पर अपना खाना-पीना व नित्यकर्म करते हैं। सर्दी के मौसम में नहाने के लिए जहां सुबह से ही बड़े कढ़ाव में पानी गर्म होने लग जाता है वहीं कुछ देसी गीजर भी हैं, जिसमें एक तरफ से ईंधन डालो दूसरी तरफ से पानी और टोंटी से गर्म पानी आने लगता है। सब्जियों और रजाई-गद्दों का अलग से भी ढेर लगा है ताकि नए आने वाले किसानों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।