सरसों तेल 16 रुपए और सस्ता हुआ, भाव अब 150 रुपए किलाे

सरसों तेल 16 रुपए और सस्ता हुआ, भाव अब 150 रुपए किलाे

सरकार ने तेलों पर महंगाई को देखते हुए अब सोया और पाम ऑयल समेत 7 जिंसों को वायदा कारोबार से बाहर कर दिया है। इसका असर यह हुआ कि सरसों के भावों में 489 रुपए क्विंटल की जबरदस्त कमी आई है। यह इस साल की सबसे बड़ी गिरावट है। सोमवार सुबह मंडी में सरसों के भाव 7150 रुपए क्विंटल रहे, जो गत दिवस से 250 रुपए कम थे। बिकवाली अधिक होने के कारण शाम को रखे हुए सौदे 6911 रुपए क्विंटल में हुए।

सरसों के तेल में भी 16 रुपए की रिकार्ड गिरावट आई है। इससे मंडी और तेल कारोबार में हडकंप रहा। व्यापारी पल-पल की जानकारी जुटाते रहे। क्‍योंकि स्टॉकिस्ट और तेल मिलर्स को भारी नुकसान है। तेल कारोबारी भूपेंद्र गोयल ने बताया कि वायदा कारोबार में साेया/पाम पर पाबंदी लगाए जाने का सरसों बाजार पर असर है।

इसलिए अगले कुछ दिन कारोबार स्थिर रहेगा। यानी किसान माल लाने से कतरा सकता है। व्यापारी भी मोलभाव करने से बचेंगे। वैसे पिछले दिनों मस्टर्ड ऑयल प्रॉड्यूसर्स एसोसिएशन की मीटिंग में इस साल 110 लाख टन सरसों पैदावार होने की संभावनाओं को देखते हुए सरसों में तेजी थमने का निष्कर्ष निकाला गया था।

सरसों तेल की डिमांड निकलने की उम्मीद
सरसाें के भावों में गिरावट आने के बाद अब सरसों तेल में डिमांड निकलने की उम्मीद है। ऑयल ब्रोकर पुनीत गोयल ने बताया कि अभी तक सरसों और साेया/पाम के भाव खेरुज में 50 रुपए तक मंदे था। इस कारण हलवाई और निम्न मध्यमवर्गीय उपभोक्ता सरसों तेल खरीदने से कतरा रहा था। नई फसल फरवरी के शुरू में ही आ जाएगी। किसानों के पास अभी 5-6 लाख टन सरसों का स्टॉक है। इसलिए बाजार उठने की संभावना कम है। ब्रोकर सुमित अग्रवाल ने बताया कि वायदा कारोबार में भाव नीचे चलने का मतलब माल की उपलब्धता पर्याप्त है। खाद्य तेलों का आयात हा़े रहा है। इसलिए भाव स्थिर रहने की संभावना है।