सुधार गृह में भी जेल जैसा माहौल ना तो सही खाना मिलता और ना ही इलाज, पिटाई से तंग हो भागे थे बच्चे

सुधार गृह में भी जेल जैसा माहौल ना तो सही खाना मिलता और ना ही इलाज, पिटाई से तंग हो भागे थे बच्चे

बाल संप्रेषण (सुधार) गृह में 8 कर्मचारियों के ड्यूटी पर होते हुए बुधवार को 6 बाल अपचारियों के भागने की घटना को बाल संरक्षण आयोग ने गंभीरता से लिया है। गुरुवार को आयोग की 3 सदस्यीय टीम ने यहां बाल सुधार गृह का निरीक्षण किया। इस दौरान एक कमरे में 12 से 13 बालक रहते हुए मिले।

पकड़े गए 3 बाल अपचारियों ने टीम को बताया कि यहां बिल्कुल जेल जैसा माहौल है। उनसे कैदियों जैसा सलूक होता है। ना तो सही खाना मिलता है और न ही सही इलाज। शिकायत करने पर आए दिन पिटाई होती है। गत 3 जनवरी को भी अधिकांश बाल अपचारियों की पिटाई हुई थी।

उन्हें फोन पर परिजनों से बात भी नहीं करने दी जाती है। इसीलिए अक्सर बाल अपचारी भाग जाते हैं। पिछले एक साल में यह चौथी घटना थी। निरीक्षण के समय बाल आयोग की सदस्य नसरत नकवी, विजेंद्र सिंह सिद्धू और वंदना व्यास के साथ भरतपुर बाल कल्याण समिति की सदस्य अनुराधा शर्मा भी थीं। टीम ने भी संप्रेषण गृह में बड़ी लापरवाही की आशंका जाहिर की है।