गलत ड्राइंग को सही बताकर बिछाई ब्रिज पर स्लैब, ट्रेन आते ही टूट गई
उत्तर-पश्चिम रेलवे के जयपुर मंडल में इन दिनों प्रशासन इंजीनियरिंग विभाग के लापरवाह अफसरों के बचाव में लगे हैं। प्रशासन ने रेल हादसे की वजह बन जाती एक गंभीर चूक के दोषियों को न सिर्फ बचाया, बल्कि मामला दबा दिया है। मामला एक रेल ब्रिज के निर्माण से जुड़ा है। जिसमें तकनीकी खामी का पता होने के बाद भी इंजीनियरिंग विभाग के अधिकरियों ने लापरवाही बरतते हुए पुल का निर्माण कर दिया।
ये है मामला- जयपुर मंडल के गेगल आखिरी स्टेशन पर ब्रिज नंबर 309 पर स्लैब डालनी थी। रेलवे मुख्यालय से मंडल के पास ड्रॉइंग भेजी गई, जो तकनीकी रूप से गलत बनाई गई थी। बावजूद इसके इस ड्रॉइंग को जयपुर मंडल के मंडल अभियंता/दक्षिण (डीईएन) ने अप्रूव किया। फिर यह ड्रॉइंग सहायक मंडल अभियंता/फुलेरा (एडीईएन) के पास गई। दोनों अधिकारियों ने ठेकेदार के कर्मचारियों से मौके पर पहुंचकर ब्रिज पर स्लैब कास्ट (डाली) करवाई, जो उल्टी डाली गई थी। बाद में इस सेक्शन में कॉशन ऑर्डर लागू करते हुए, धीमी गति से ट्रेन संचालन किया गया।
ऐसे में जब ट्रेन ब्रिज से गुजरी तो स्लैब टूट गई। जिसके बाद भी ट्रेन को ब्रिज क्रॉस करवाया गया, जिसके चलते बड़ा हादसा होने से टल गया। गौरतलब है कि पिछले दो माह से प्रशासन जोखिम के साथ इस ब्रिज पर से 10 केएमपीएच से ट्रेन संचालन कर रहा है। मंडल के अधिकारियों ने चुप्पी साधे रखी। रेलवे के जीएम को भी गलत जानकारी दी गई। मंडल के सीनियर डीईएन (कोऑर्डिनेशन) ने डीईएन और एडीईएन को बचाने के लिए निचले कर्मचारियों को पूरे मामले का दोषी माना और दो कार्य निरीक्षक (आईओडब्लयू) को संस्पेंड कर दिया।
इस मामले में मुख्य रूप से मुख्यालय की ड्रॉइंग सेक्शन के कर्मचारी, सीनियर डीईएन (कोऑर्डिनेशन), डीईएन (साउथ), एडीईएन (फुलेरा) जिम्मेदार हैं। इन्हें ड्रॉइंग के गलत होने की जानकारी थी, फिर भी इन्होंने ट्रेन संचालन के साथ इतना बड़ा जोखिम उठाया। जांच कमेटी तक नहीं बनी।


