पहाड़ियां दूसरे दिन भी धधकती रही:वन्यजीवों के साथ 27 हजार पौधे संकट में, वन विभाग सहित 5 संस्थान बचाने में जुटे
शहर से सटे खेलगांव के पास की पहाड़ियां दूसरे दिन भी सुलगती रही। आखिर एक दिन बाद तपन वन विभाग सहित अन्य संस्थाओं तक पहुंची। शनिवार को नगर निगम की दमकल, यूआईटी, वन विभाग, सिविल डिफेंस, पहाड़ी गाेद लेने वाली कंपनी और पाैधे लगाने का टेंडर लेने वाली नर्सरी के 100 ज्यादा कर्मचारी दिनभर आग बुझाने में जुटे रहे।
32 घंटे पहले सुलगी आग अब 8 पहाड़ियों के 60 हैक्टेयर इलाके तक पहुंच गई। यूआईटी सहित अन्य संस्थाओं द्वारा तीन साल में लगाए गए 27 हजार पौधों के अलावा पक्षी और वन्यजीव संकट में हैं। अधिकांश पौधे राख में भी तब्दील हो चुके हैं। आग को आबादी एरिया में आने से रोकने के लिए दमकलें आसपास पानी छिड़क रही है। आग शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे ईएसआईसी हॉस्पिटल के पास की पहाड़ियों से शुरू हुई थी।
आग नहीं थमने के 2 बड़े कारण; पहला सिस्टम, दूसरा प्राकृतिक
1. संसाधन ही नहीं : वन विभाग के पास पत्तों से झाडू बनाकर आग बुझाने जैसे पुराने तरीके हैं। दमकल आग बुझाने पहुंची तो पाइप ही 150 मीटर से लंबा नहीं था। साठ मीटर के बाद मोटर से पानी फेंकने की ताकत भी कम हो जाती है। पहाड़ियों पर दमकल चढ़ नहीं पाती।
2. तेज हवा और गर्मी : यूआईटी एक्सईएन नीरज माथुर ने बताया कि हवा के कारण आग थामने में दिक्कतें आ रही हैं। गर्मी भी उसे फैलाने का काम कर रही है। क्योंकि पत्ते-घास सूख चुके हैं। धूप से पहाड़ियां तपती है सो अलग।


