जीने की ललक:101 साल की अन्नी बोली, "टीको लगा दो, हाल तो घणों ही जीणो है", 60 के पार दिखा रहे दम
केस -1
रूपादेवी पत्नी गोविन्दराम। उम्र 107 साल। जीने की तमन्ना ऐसी है कि कोरोना जैसी भयावह बीमारी से लड़ने का दम रखती है। रूपादेवी सोमवार को जब कोविड 19 का टीका लगवाने पहुंची तो ऑपरेटर ने उम्र पूछ। साथ वाले बताया 107 साल। दोबारा पूछा गया कि जन्म कब का है, जवाब मिला 1914 का। रूपा देवी का वोटर आइडी कार्ड पेश किया गया। उम्र ये ही लिखी हुई थी।
केस-2
अन्नी। उम्र 101 साल। जन्म वर्ष 1920 का है। अन्नी भी अपने पड़पोते के साथ वैक्सीनेशन के लिए पहुंची तो नर्सिंगकर्मी उन्हें देखकर चकित थे। वो न सिर्फ आराम से चल फिर सकती है बल्कि आगे भी इसी तरह जीना भी चाहती है। नर्सिंगकर्मी से वो कहती है "टीको लगा दो थे तो, हाल घणों ही जीणो है।"
दरअसल, रूपादेवी और अन्नी ही नहीं, बीकानेर में ऐसे दर्जनभर बुजुर्ग हैं, जिन्होंने अपना वैक्सीनेशन करवाया है। सबसे खास बात यह है कि गांवों में वैक्सीनेशन शुरू होने के साथ ही ऐसे लोग सामने आये। नब्बे के पार लोगों की संख्या बहुत अधिक है, वहीं जिले में 100 के पार वाले कई बुजुर्ग सामने आये।
60 से पार से ही आंकड़ा लाख के पार हुआ
बीकानेर में टीकाकरण करवा चुके लोगों की संख्या अब एक लाख के पार पहुंच गई है। इसमें सबसे बड़ा योगदान 60 से पार वाले बुजुर्गों का ही है। RCHO डॉ. राजेश गुप्ता बताते हैं कि गांवों में बुजुर्ग बिना किसी हिचक के टीकाकरण करवा रहे हैं। इनमें पुरुष व महिला दोनों बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। मंगलवार को ही 45 से 59 वर्ष आयु के 3589 वैक्सीनेशन हुए तो 60 साल से ऊपर के 7 हजार 465 का वैक्सीनेशन हुआ। कमोबोश हर रोज ही आंकड़ों में बड़ा अंतर रहा है, जिसमें वृद्धजन आगे होते हैं। न सिर्फ बीकानेर बल्कि प्रदेशभर में 60 से अधिक आयु के लोगों की जीने की तमन्ना ज्यादा नजर आती है।
इनका कहना है
RCHO डॉ. राजेश गुप्ता का कहना है कि सभी टीकाकरण केंद्रों पर सबसे अधिक वृद्धजन ही पहुंच रहे हैं। उनको देखकर ही सभी फ्रंटलाइन वर्कर्स को टीकाकरण करवाना चाहिए। बड़ी संख्या में दूसरी डोज लगवाने भी फ्रंटलाइन वर्कर नहीं पहुंचे। इन बुजुर्गों से ही सीख लेनी चाहिए।


