कोरोना महामारी में पांच महीने में नहीं खर्च किए 35 करोड़ रुपए, अब रैपिड एंटीजन टेस्ट से इनकार
कोरोनाकाल में केन्द्र के आपदा प्रबंधन विभाग (एनडीआरएफ) ने हॉट-स्पॉट, कोविड सेन्टरों और ज्यादा संक्रमण के मामले मिलने पर ‘रैपिड एंटीजन टेस्ट’ के जरिए कोरोना का 20 मिनट में पता करने के लिए अप्रेल माह में 35 करोड़ रुपए दिए है। लेकिन पांच माह बीत जाने के बाद भी 35 करोड़ रुपए का इस्तेमाल नहीं होना गंभीर लापरवाही है। राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने भी पांच माह में भी न किट और ना ही जांच के उपकरण खरीदे। इससे उच्च स्तर के अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
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भास्कर ने मामले की तहकीकात की। पता चला कि राज्य सरकार 35 करोड़ रुपए को खुर्दबुर्द करने में लगी है। राज्य के एसडीआरएफ को केन्द्र की ओर से मिले 35 करोड़ रुपए को किसी अन्य काम में लेने के लिए पत्र भी लिख चुकी है। नियमानुसार जिस काम के लिए पैसा मिला है, उसी काम में लिया जा सकता है। अन्यथा लेप्स हो जाता है। सरकार यह कहकर पल्ला झाड़ रही है कि रैपिड एंटीजन टेस्ट शुद्वता पर खरा नहीं उतरने की बात कह रही है। अब सवाल उठता है कि राज्य सरकार पांच माह में ऐसी कोरोना महामारी में भी पैसे का इस्तेमाल क्यों नहीं किया।


