बे-बस सिस्टम:सड़क के बीच में राेक देते हैं प्राइवेट बसें, जनता रोज झेलती है हादसाें का खतरा, कुछ नहीं कर पा रहे अधिकारी
शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए कलेक्टर नमित मेहता ने गुरुवार काे कुछ इलाकाें का दाैरा किया और सुधार के लिए निर्देश दिए। इसे देखते हुए भास्कर ने शुक्रवार काे तीन रिपाेर्टर्स काे शहर के अलग-अलग इलाकाें में भेजा, ताकि कलेक्टर व प्रशासन काे ट्रैफिक से जुड़ी समस्याओं की असली तस्वीर दिखाई जा सके।
दिनभर की इस कवायद में एक बात सामने आई कि शहर के ट्रैफिक से जुड़ी ज्यादातर परेशानियाें का एक ही कारण है-प्राइवेट बसें। क्याेंकि इनके ड्राइवर सड़क के बीच में कहीं भी और कभी भी बस राेक देते हैं। आम जनता के सामने हादसाें का खतरा झेलने के सिवा काेई विकल्प नहीं रहता है। वहीं, प्रशासन के अधिकारियाें से भी ये बात छिपी नहीं है, लेकिन वे काेई गंभीर प्रयास नहीं कर रहे हैं।
1. अंबेडकर सर्किल : सवारियों के लिए कहीं भी रुक जाती हैं बसें, पीबीएम के मरीज भी झेलते हैं परेशानी
बसों के ठहराव से सबसे बड़ी समस्या अंबेडकर सर्किल पर है। जयपुर, जोधपुर, अजमेर, कोटा, उदयपुर से आने-जाने वाली प्राइवेट और रोडवेज बसें इस सर्किल पर रुककर सवारी लेती और उतारती हैं। कई बार ताे सवारी लेने की हाेड़ में ड्राइवर बसाें काे सड़क के बीच में ही राेक देते हैं।
इस कारण तुलसी सर्किल, रानीबाजार पुल, मेजर पूर्णसिंह सर्किल और डीआरएम ऑफिस की तरफ से आने-जाने वाले लोगाें काे सर्किल पर लंबे जाम का सामना करना पड़ता है। मरीजों को पीबीएम अस्पताल जाने के लिए अंबेडकर सर्किल से गुजरना पड़ता है और बसों के ठहराव के कारण उन्हें देरी होती है।
ये है समाधान
रानीबाजार क्राॅसिंग पर अंडरपास स्वीकृत है, लेकिन ये बन नहीं रहा। अंडरपास बनने पर काफी हद तक राहत मिलेगी। अंबेडकर से रानीबाजार पुल तक की रोड को चौड़ा करने की जरूरत है। मेडिकल काॅलेज रोड पर पुल से नीचे उतरते ही सामने पीबीएम अस्पताल की दीवार है। प्रशासन को यहां जनहित में अस्पताल की जगह लेकर दीवार पीछे करनी चाहिए।
2. जैन काॅलेज के पास : हाे चुके हैं कई हादसे
नोखा रोड पर जैन कॉलेज के पास सिने मैजिक की तरफ से आने वाली सड़क पर भी बसों का ठहराव होने से आमजन को काफी परेशानी होती है। यहां बसें सड़क पर रुकती हैं, जिससे मेन हाइवे के अलावा आस-पास के रास्तों से आने वाले लोग परेशान होते हैं। साथ ही दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इस जगह पहले भी कई हादसे हो चुके हैं।
ये है समाधान
इसी रोड पर ट्रक ऑपरेटर्स एसोसिएशन का पुराना भवन और मैदान खाली पड़ा है। प्रशासन प्राइवेट बसों के लिए यहां अस्थाई स्टैंड बना दे तो शहरवासियों को काफी राहत मिलेगी।
3. करमीसर तिराहा : ईंट-बजरी के ढेर से समस्या बढ़ी
जैसलमेर हाइवे पर करमीसर तिराहे के पास सड़क के दोनों ओर ईंट-बजरी के ढेर लगे रहते हैं। इसके अलावा वहां बसों का ठहराव भी हो रहा है। कई बार सड़क पर बजरी बिखरी जाती है जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। मुरलीधर व्यास कॉलोनी के बाशिंदे और आसपास के दुकानदार कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकाला गया।
ये है समाधान
प्रशासन को सबसे पहले सड़क के दोनों ओर ईंट-बजरी के ढेर लगाने पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। फौरी तौर पर तो कार्रवाई होती है लेकिन इसका स्थायी समाधान पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
एक्सपर्ट व्यू : रूट के हिसाब से हाइवे पर बनाएं बसाें का स्टैंड
जिस रूट की चलने वाली बसें हैं, उसी रूट पर शहर से बाहर हाइवे पर बस स्टैंड बनाने चाहिए। श्रीगंगानगर रोड पर बीछवाल में बस स्टैंड बना है। उस रूट पर आने-जाने वाली बसों का ठहराव पूरी तरह से वहीं करना होगा। इसके अलावा जयपुर रोड, नोखा रोड पर भीनासर में और पूगल रोड पर भी उचित स्थान देकर बसों के ठहराव के लिए स्टैंड बनाने होंगे। शहर में सिटी बसें चलाई जाएं, ताकि आमजन उनके जरिए हाइवे के प्राइवेट बस स्टैंड तक आसानी से पहुंच सकें। पुलिस और प्रशासन की लापरवाही के कारण बीछवाल के स्टैंड पर प्राइवेट बसें खड़ी नहीं हाेती हैं। - ओमप्रकाश जोशी, रिटायर्ड आरपीएस


