वैक्सीन के रेट पर राजस्थान हाईकोर्ट सख्त: अलग-अलग दामों पर उपलब्ध करवाने के मामले में केंद्र, राज्य और दोनों वैक्सीन निर्माता कंपनियों से मांगा जवाब

Apr 29, 2021 - 07:50
Apr 29, 2021 - 07:56
वैक्सीन के रेट पर राजस्थान हाईकोर्ट सख्त: अलग-अलग दामों पर उपलब्ध करवाने के मामले में केंद्र, राज्य और दोनों वैक्सीन निर्माता कंपनियों से मांगा जवाब

देश में कोरोना महामारी के बीच वैक्सीन की अलग-अलग रेटों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर कोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकार और दोनों वैक्सीन निर्माता कंपनियों से जवाब मांगा है। कोर्ट ने यह आदेश पत्रकार मुकेश शर्मा की जनहित याचिका पर दिया है।

याचिका की पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट अभय भंडारी ने कोर्ट में बताया कि देश में बनी वैक्सीन के तीन अलग-अलग रेट लेना गलत है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने बजट में वैक्सीनेशन के लिए 35 हजार करोड़ का प्रावधान रखा है। इसके अलावा, पीएम केयर फंड में भी लोगों ने भारी मात्रा में डोनेट किया है। यह राशि इस महामारी में वैक्सीनेशन व अन्य मेडिकल सामग्री की खरीद के लिए काम में ली जा सकती है।

इसके बावजूद वैक्सीन निर्माता केंद्र सरकार की अनुमति से भारी लाभ कमाने के उद्देश्य से तीन अलग-अलग रेट में वैक्सीन बाजार में दे रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में 45 साल से ऊपर के आयु वर्ग के लिए केंद्र सरकार मुफ्त में दे रही हैं। ऐसे में सरकार को 18 से 45 साल के आयु वर्ग के लिए भी निशुल्क वैक्सीन मुहैया करवानी चाहिए।

इस याचिका पर सुनवाई के बाद जस्टिस सबीना की खंडपीठ ने आदेश देते हुए इस मामले में केन्द्र सरकार, राज्य सरकार और वैक्सीन निर्माता कंपनियों भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। आपको बता दें कि दोनों कंपनियां केन्द्र, राज्य और निजी अस्पतालों तीनों को अलग-अलग रेटों पर वैक्सीन उपलब्ध करवा रही है।

ये हैं वैक्सीन के अलग-अलग रेट:
भारत बायोटेक (कोवैक्सीन): केन्द्र सरकार 150, राज्य सरकार 600, निजी अस्पताल 1200 रुपए।
सीरम इंस्टीट्यूट (कोवीशील्ड): केन्द्र सरकार 150, राज्य सरकार 300, निजी अस्पताल 600 रुपए।