सतर्क रहें: दादा-पिता को काेराेना ने छीन लिया, अब दादी-मां-बहन की जिम्मेदारी मुझ पर, पढ़ाई भी छूटी, व्यर्थ भीड़ में न जाएं
ये पुलिस लाइन टेकरी निवासी 24 वर्षीय भव्य सुहालका हैं। हाल ही में बीबीए की पढ़ाई पूरी कर आगे की पढ़ाई का प्लान बना रहे थे कि इनके कंधों पर परिवार के बिजनेस, दादी, मां और बहन की जिम्मेदारी आ गई। भव्य बताते हैं कि समाजसेवा में हमेशा आगे रहने वाले 75 वर्षीय दादा रतनलाल सुहालका और 47 वर्षीय पिता सुनील सुहालका काे काेराेना काल में मदद करते हुए कहां से संक्रमण मिला पता ही नहीं चला।
22 मई काे दादा और 31 मई को पिता का काेराेना से निधन हाे गया। अब पढ़ नहीं पाऊंगा। कुछ दिनाें पहले मैंने साेचा भी नहीं था कि अचानक मेरे कंधों पर इतना भार आ जाएगा। दादा की जब निधन हुआ ताे पिता आईसीयू में थे। वह न ताे मुखाग्नि दे पाए और न उनका चेहरा पाए। मेरी लोगों से विनम्र अपील है कि भीड़ से मिले संक्रमण से हम परिवार के मुखियाओं को खो चुके हैं, इसलिए व्यर्थ भीड़ का हिस्सा न बनें, मास्क पहनें, दूरी का ध्यान रखें। फतहसागर पर दादा-पिता की फोटो लेकर प्रतीकात्मक रूप से खड़े भव्य।


