आरबीएम अस्पताल: घूसखोर डॉक्टर को 2.08 लाख रुपए वेतन के अलावा सरकार हर माह देती है 29400 एनपीए, ताकि घर पर फीस लेकर रोगियों को नहीं देखे
- डॉक्टर पत्नी को भी मिलती है 2.12 लाख रुपए तनख्वाह
- 4.50 लाख रुपए मासिक इनकम के बावजूद ले रहा था रोगियों से रिश्वत
बवासीर का ऑपरेशन करने के बदले रोगी से दो हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने से एक दिन पहले भी भ्रष्ट डॉक्टर अनिल गुप्ता ने अपने घर पर उससे एक हजार रुपए लिए थे। यह रकम एसीबी की सत्यापन कार्यवाही के दौरान ली गई थी। घूसखोर डॉक्टर का यह हाल तो तब है जब घर में 4.50 लाख से ज्यादा मासिक इनकम है।
इसमें डॉक्टर अनिल को सरकार हर महीने मूल वेतन का 20 प्रतिशत यानि 29400 रुपए बतौर नॉन प्रेक्टिस अलाउंस (एनपीए) देती है। इसका मतलब है कि उसे फीस लेकर घर पर रोगी देखने की जरूरत नहीं है। हालांकि यह स्वैच्छिक है। लेकिन, एनपीए नहीं लेने वाले डॉक्टर भी घर पर रोगियों से रिश्वत नहीं ले सकते।
भास्कर संवाददाता ने जब इसकी पड़ताल की तो पता चला कि आरबीएम और जनाना अस्पताल के ज्यादातर डॉक्टर सरकार से एनपीए लेने के बावजूद फीस लेकर घर पर रोगी देख रहे हैं, प्राइवेट अस्पतालों में जाकर जांच और ऑपरेशन तक कर रहे हैं।
आरबीएम अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक घूसखोर डॉक्टर अनिल गुप्ता का मूल वेतन 1.47 लाख रुपए है। उसे बतौर महंगाई भत्ता 49 हजार 392 रुपए, एनपीए के तौर पर 29 हजार 400 रुपए और एचआरए के रूप में 11 हजार 760 रुपए यानि 2 लाख 37 हजार 552 रुपए वेतन मिलता था। जुलाई में उसके वेतन से बतौर इनकम टैक्स 40 हजार रुपए, जीपीएफ के 8 हजार 900 रुपए, एसआईपी के 3 हजार और आरजीएमएस के 875 रुपए की कटौती हुई।
इन कटौतियों के बाद उन्हें 1 लाख 84 हजार 777 रुपए का भुगतान किया गया। उसकी डॉक्टर पत्नी को भी हर महीने 2.12 लाख रुपए वेतन मिलता है। डॉक्टर अनिल गुप्ता के पिता भी सरकारी सेवा में थे। इसलिए उनकी मां को पेंशन मिलती है। बेटे अच्छा खासे पैकेज पर नौकरी में हैं।
जब एसीबी ने अनिल गुप्ता को पकड़ा तो पत्नी ने उलाहना भी दिया था कि भगवान का दिया सबकुछ है, फिर 2000 रुपए रिश्वत लेने की क्या जरूरत थी। उल्लेखनीय है कि रंगे हाथों ट्रैप के 12 घंटे में ही एसीबी द्वारा बिना गिरफ्तारी छोड़ दिए जाने से रसूखदार डॉक्टर का मामला पूरे प्रदेश में चर्चित है। इस मामले में एसीबी ने डॉक्टर को राहत पहुंचाने के हर संभव सभी प्रयास किए हैं।


