ड्यूटी खत्म होने से पहले जिंदगही खत्म:रेलवे के हिसाब में 50 हजार रुपए कम मिले

ड्यूटी खत्म होने से पहले जिंदगही खत्म:रेलवे के हिसाब में 50 हजार रुपए कम मिले

जाेधपुर: जिले के ओसियां रेलवे स्टेशन पर कार्यरत रेलवे के एक बुकिंग क्लर्क ने ड्यूटी खत्म होने से पहले ही अपनी जिंदगी खत्म कर ली। काउंटर पर पैसों के लेनदेन का कम होने और बीते कुछ माह से सरकारी कोष में राशि नहीं जमा करवाने के कारण रेलवे का एक निरीक्षक वहां पता करने गया था कि आखिर वह हिसाब-किताब क्यों नहीं दे रहा है।

बुकिंग क्लर्क का हिसाब मिलाया तो उसमें 50 हजार रुपए कम निकले। इस पर क्लर्क कैश लाने की बात कह कर कमरे से बाहर निकला और दूसरे कमरे में जाकर फंदे पर झूल गया। ओसियां पुलिस भी मौके पर पहुंची और परिजनों के जोधपुर से वहां पहुंचने के बाद शव को फंदे से नीचे उतारा।

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दरअसल, ओसियां रेलवे स्टेशन पर यूटीएस कम रिजर्वेशन काउंटर भी है। हालांकि पिछले पांच माह से वहां कोई ट्रेन नहीं जा रही, ऐसे में टिकटों की बिक्री भी नहीं है। वहां कार्यरत बुकिंग क्लर्क हितेश चौधरी (33) को कोरोना काल में रद्द हुई ट्रेनों के रिफंड के लिए राशि दी गई थी। इन दिनों वैसे भी रेलवे एक-एक पैसे पर नजर रखे हुए है। ऐसे में रेलवे के लेखा विभाग ने सभी स्टेशनों से क्रेडिट व कैश रेमिट के बारे में जानकारी मांगी थी। वाणिज्यिक विभाग स्टेशनों से यह जानकारी मंगवाने के लिए रोज अपडेट ले रहा था।

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रेलवे के हिसाब में 50 हजार रुपए कम मिले, बुकिंग क्लर्क राशि लाकर जमा करवाने की बात कह बाहर निकला ...फिर स्टेशन पर ही फंदा लगा दे दी जान

कई स्टेशनों से इस बारे में जानकारी नहीं आने पर वहां वाणिज्यिक निरीक्षकों (सीएमआई) को भेजा जा रहा है। ऐसे में ओसियां में जब वाणिज्यिक निरीक्षक जेपी मीणा पहुंचा तो बुकिंग क्लर्क चौधरी के पास 50 हजार रुपए का कैश कम मिला। सीएमआई स्टेशनों पर जाते हैं तो सबसे पहले कर्मचारी के पास उपलब्ध कैश की ही जांच करते हैं। इस बारे में पूछताछ की तो उसने कहा कि अभी घर से लाकर जमा करवाता हूं। वह निकला और कुछ देेर तक लौटा ही नहीं। तभी जानकारी मिली कि स्टेशन की पुरानी बिल्डिंग के वेटिंग रूम में हितेश फंदे से लटका हुआ है।

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यह सुन सभी दंग रह गए। रेलवे के मुताबिक हितेश ने जुलाई से राजकीय कोष में कोई पैसा जमा नहीं करवाया था, इसलिए उसका डिफाल्टर की सूची में बार-बार नाम आ रहा था। ऐसे मामलों में कर्मचारी पैसे या उसकी रसीदें जमा करवा अपना हिसाब कर लेते हैं।

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शादी के 8 साल बाद 3 माह पहले ही जन्मे मासूम के सिर से उठा पिता का साया
जोधपुर में कुड़ी भगतासनी हाउसिंग बोर्ड निवासी हितेश के पिता अशोक कुमार भी रेलवे में नौकरी करते थे। उनकी मौत के बाद 2014 में उसे रेलवे में अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। वह बुकिंग क्लर्क लगा। मां व पत्नी के साथ रह रहा था। बहन की शादी हो चुकी थी। खुद की शादी 2012 में हुई थी लेकिन बच्चा नहीं हुआ था। पिछले साल भांजी जन्मीं तो खुशी उसके चेहरे पर साफ झलकती थी।

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उस मासूम जिंदगी से उसे कितना प्यार था, उसे जाहिर करने के लिए उसने नवजात भांजी के साथ कई फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड किए थे। एक साल पहले ही उसे जोधपुर से ओसियां भेजा गया था। शादी के 8 साल बाद 3 माह पहले ही हितेश की पत्नी ने बेटे को जन्म दिया। खुदकुशी करने से ठीक पहले जो बात हुई, वह भी महज 50 हजार रुपए की थी। नौकरी के लिहाज से यह राशि उसके एक माह के वेतन के बराबर ही थी।