भगवान शिव का अतिप्रिय पौधा भाँग !!
#भांग
#Cannabis_sativa_indica
#hemp
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भगवान शिव को भाँग अतिप्रिय है..हर शिव मंदिर में शिवलिंग पर भांग का लेप लगाया जाता हैं... जो शिवलिंग के क्षरण को रोकता हैं...भगवान शिव को केवल भांग ही नही पसंद अनेक वनस्पतियां उनकी प्रिय हैं और वो हर वनस्पति अपने आप मे अद्भुत ओर चौकाने वाली हैं...।।
भांग के नर पौधे के पत्तों को सुखाकर भांग तैयार की जाती है.....भांग के मादा पौधों की रालीय पुष्प मंजरियों से #गांजा तैयार किया जाता है......भांग की शाखाओं और पत्तों पर जमे राल के समान पदार्थ को #चरस कहते हैं....।
भांग की खेती प्राचीन समय से ही भारतवर्ष में की जाती रही है ....ईसकी खेती करने वाले को पुराने समय में #पणि' कहते थे..।
अगर आपको कहें कि भांग के पौधे से कपड़े ,प्लास्टिक, कागज, बिल्डिंग मटेरियल,और #बायोडीजल भी तैयार किए जाते हैं, तो कम लोग ही विश्वास करेंगे? पर यह सच है।.....लगभग 8 हजार पूर्व चीनियों ने भांग से कपड़े बनाने की विधि को विकसित कर लिया था ....वर्तमान में चीनियों ने इससे बने कपड़ों का उपयोग फैशन के लिए शुरू किया..... यही नहीं, भांग के पौधों से जूते और जीन्स भी तैयार किए जाते हैं......करीब 2 हजार वर्ष पूर्व से इस पौधे का इस्तेमाल #कागज बनाने के लिए होता रहा है..... इसका उत्पादन भले ही कम हो, लेकिन इस कागज की खासियत यह है कि रिन्यूबल होता है...... भांग के पौधे से बिल्डिंग मैटेरियल भी बनाए जाते हैं.....नीदरलैन्ड और आयरलैन्ड में कम्पनियां इन पौधों से बिल्डिंग मैटेरियल जैसे फाइबर बोर्ड, प्रेस बोर्ड और हेम्पक्रीट जैसे प्रोडक्ट्स का उत्पादन करती हैं....।
40 के दशक में कार निर्माता कम्पनी #फोर्ड ने भांग के पौधे से बनी प्लास्टिक से एक प्रोटोटाइप कार बनाने में सफलता हासिल की थी...... हालांकि इस कार को कभी बाजार के लिए नहीं उतारा गया....... कमेंट फोटो देखे जिसमे हेनरी फोर्ड इस कार पर कुल्हाड़ी से वार करते दिखाई पड़ रहे हैं..।
इसके बीजों के अनेक उपयोग आज भी पहाड़ी लोग जानते है, वे इसके बीजों की चटनी???????? बड़े चाव से खाते है....इस पौधे के जड़ और बीज में मौजूद तेल से बायोडीजल बनाया जा सकता है.....पर दुर्भाग्य से यह पौधा इतना #कुख्यात है कि इस योजना पर कोई भी देश या प्रशासन ठीक से अमल नहीं कर रहा...।
भांग इस पृथ्वी पर पाया जाने वाला एकमात्र ऐसा पादप है जो नयी मस्तिष्क कोशिकाओं के बनाने की प्रक्रिया आरंभ करने की क्षमता रखता है...
मंदरमंथानाज्जलनिधौ, पीयूषरूपा पूरा,
त्रैलोक्यई विजयप्रदेती विजया, श्री देवराज्ज्प्रिया,
लोकानां हितकाम्या क्षितितले, प्राप्ता नरैः कामदा,
सर्वातंक विनाश हर्षजननी, वै सेविता सर्वदा।
#अथर्ववेद में जिन पांच पेड़-पौधों को सबसे पवित्र माना गया है उनमें भांग का पौधा भी शामिल है. इसके मुताबिक भांग की पत्तियों में देवता निवास करते हैं. अथर्ववेद इसे ‘प्रसन्नता देने वाले’ और ‘मुक्तिकारी’ वनस्पति का दर्जा देता है. आयुर्वेद के मुताबिक भांग का पौधा औषधीय गुणों से भरपूर है. सुश्रुत संहिता, जो छठवीं ईसा पूर्व रची गई, के मुताबिक पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने और भूख बढ़ाने में भांग मददगार होती है. आयुर्वेद में इसका इस्तेमाल इतना आम है कि 1894 में गठित भारतीय भांग औषधि आयोग ने अपनी रिपोर्ट में इसे ‘आयुर्वेदिक दवाओं में #पेनिसिलीन’ कहा था....।।
#औषधीय_लाभ
भांग में इंफ्लैमेटरी तथा एनेलजेसिक केमिकल्स होते हैं.....जिसके शरीर के दर्द में तुरंत आराम मिलता है....एक सीमित मात्रा में भांग का प्रयोग करने से मांसपेशियों का दर्द, आर्थराइटिस (गठिया) के दर्द में तुरंत राहत मिलती है.......बहुत तेज बुखार होने पर थोड़ी सी भांग पीने से शरीर का तापमान सामान्य होकर फीवर उतर जाता है......#सेक्सुअल प्रॉब्लम्स (जैसे प्राइवेट पार्ट में उत्तेजना न होने, यौन इच्छा कम होना आदि) होने पर भी आयुर्वेद में भांग का सेवन बताया जाता है......किसी भी तरह की चिंता, अवसाद तथा डिप्रेशन संबंधी बीमारियों को दूर करने के लिए भांग के सेवन रामबाण उपाय है......यदि किसी कारण से भूख लगना बंद हो गई हो तो सीमित मात्रा में भांग का सेवन काली मिर्च के साथ करने से भूख बढ़ जाती है.....लगातार सिर में दर्द रहने पर भांग की पत्तियों के रस का अर्क बनाकर दो-तीन बूंद कान में डालने से सिरदर्द हमेशा के लिए चला जाता है.....मानसिक संतुलन खोने पर भांग में हींग मिलाकर सेवन करवाई जाती है.....भांग के नियमित सेवन से कैंसर से शरीर में हुए घाव भी जल्दी ठीक हो जाते हैं..।
#सावधानियां
....डायबिटीज के रोगियों, हार्ट पेशेंट्स, गर्भवती महिला, बच्चों तथा बुजुर्गों को भांग का सेवन नहीं करना चाहिए...।
#शोधकार्य
उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले में पंतनगर सीमैप के वैज्ञानिकों की टीम ने #कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज का फॉर्मूला भांग में ढूंढ निकाला है. वैज्ञानिक भांग में पाए जाने वाले औषधीय तत्व टीएचसी-ए, सीबीडी व कैनाविनायड युक्त भांग की प्रजाति विकसित करने में जुटे हैं और उन्हें सफलता भी हाथ लगी है....यानि अगर सब कुछ ठीक ठाक रहा तो जल्द ही भांग से निकलने वाले औषधीय तत्वों से कैंसर व अन्य गंभीर बीमारियों के लिए कारगर दवाइयां बन सकेंगी....।
भांग की खेती बिना शासन की अनुमति करना...क़ानूनी अपराध है।।
भांग से जुड़ी कोई जानकारी हो तो अवश्य साझा करें..।।


