4000 पर्यटकों को जंगल में सफारी करवा चुकी राजेश्वरी

4000 पर्यटकों को जंगल में सफारी करवा चुकी राजेश्वरी

अरावली की पहाड़ियों में बना लेपर्ड कंजर्वेशन एरिया में वाइल्ड लाइफ सफारी करने प्रतिवर्ष हजारों पर्यटक पहुंचते हैं। लेपर्ड फैमिली की अठखेलियों को निहारने और अपने कैमरे में कैद कर इस पल को यादगार भी बनाते हैं। यहां राजेश्वरी राणावत भी पर्यटकाें को वाइल्ड लाइफ सफारी करवाती हैं।

राणावत जिले की पहली महिला वाइल्ड लाइफ सफारी गाइडर भी हैं। बायोलॉजी में बीएससी करने के बाद उन्होंने वाइल्ड लाइफ में ही अपना कॅरिअर बनाने के बारे में साेचा। अब लेपर्ड के बीच रहकर पर्यटकों को रोमांचित सफर भी करवा रही हैं। वे बताती हैं जवाई लेपर्ड रिजर्व में करीब 55 लेपर्ड हैं।

धीरे-धीरे इनका कुनबा बढ़ रहा है, जाे यहां के लिए अच्छा संकेत है। लेपर्ड को बचाना हमारा कर्तव्य है। यहां पर्यटक लेपर्ड को देखने के लिए दो घंटे से अधिक समय तक सफारी करते हैं। कुछ समय पूर्व ही एक गेस्ट को मैं लेपर्ड सफारी करवा रही थी। एक पहाड़ी पर एक जुड़वां परिवार नजर आया। उसके साथ उसका शावक भी था। वो फिमेल लेपर्ड थी, जिसका नाम जिवदा फिमेल है। इन लेपर्ड फैमिली को देखकर पर्यटक काफी रोमांचित होते हैं।

जब ट्रैकिंग के बीच झाड़ियों में निकलकर आया लेपर्ड, 5 फीट दूरी पर खड़ा होकर पर्यटकों को घूरने लगा

राणावत ने बताया कि एक घटना घटी उन्हें हमेशा याद रहेगी। करीब एक साल पहले जंगल में अकेली ट्रैकिंग पर गई हुई थी। बिना किसी शाेर और हलचल के छिपते छिपाते चट्टान पर लेपर्ड को सर्च कर रहीं थी। कुछ समय इंतजार करने के बाद भी कुछ नहीं दिखा। फिर अचानक उनके पीछे झाड़ियों में कुछ हलचल होने की आवाज आई। झाड़ियों में से एक लेपर्ड निकलकर आया।

पीछे देखा तो एक बड़ा मेल लेपर्ड खड़ा था, जो करीब 5 फीट की दूरी पर ही था। उन्हाेंने बताया कि कुछ पल के लिए मैंने लेपर्ड को और लेपर्ड ने मुझे, हम दोनाें एक दूसरे को देखते रह गए। हम दोनाें एक पल के लिए एक दूसरे देखकर डर गए थे।

मेरी सांस कुछ पल के लिए थम गई, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। मुझे सांप सूंघ गया था। करीब 2 मिनट के बाद ही लेपर्ड दूसरी तरफ जंप लगाकर वहां से भाग गया। यह दिन मेरे लिए काफी यादगार रहा। मुझे उस दिन उस बात का अफसोस भी रहा कि लेपर्ड के साथ सेल्फी नहीं ले पाई।

11 साल की उम्र बनाया शाैक, 2016 में शुरू किया काम
वाइल्ड लाइफ सफारी गाइडर राणावत बताती हैं कि वाइल्ड लाइफ सफारी वे 2016 से करवा रही है। इस फील्ड में उनकी हॉबी 11 साल की उम्र में लग गई थी, जब उनके पिता उदयसिंह राणावत उन्हें जंगल में ट्रैकिंग पर ले जाते थे। उन्होंने बताया कि उनके प्रेरणास्रोत पूर्व फोरेस्ट मिनिस्टर बीना काक है। इस लाइन में उनके पिता उदय सिंह ने उनका पूरा सपोर्ट किया। अब जंगल का एक-एक चप्पा जान चुकी हूं। वे बताती हैं 4 साल में करीब 4 हजार से अधिक पर्यटकों को लेपर्ड सफारी करवाई है।