चार कमराें में बिना मास्क के करीब 65 बच्चाें काे पढ़ा रहे हैं शिक्षक

चार कमराें में बिना मास्क के करीब 65 बच्चाें काे पढ़ा रहे हैं शिक्षक

देश में कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। संक्रमण को रोकने के लिए सरकार ने स्कूल, कॉलेज व कोचिंग संस्थानों में बच्चों के आने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए राज्य सरकार को धारा 144 लगानी पड़ी है। ऐसे हालात में भी अलवर जिले के डड़ीकर गांव के पास एक स्कूल संचालित है।

निर्वाण वन फाउंडेशन संस्था की ओर से नर्सरी से आठवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए संचालित इस स्कूल में बच्चों को चार कमराें में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। यहां ना तो बच्चों ने मास्क पहन रखे हैं और ना ही सोशल डिस्टेंस की पालना हो रही है। संस्था चलाने वालों को ना तो संक्रमण की चिंता है और ना ही केंद्र व राज्य सरकार की गाइडलाइन की। ऐसे में बच्चों की जान पर जोखिम है।

चार कमरों में पढ़ाई - इस स्कूल के चार कमरों में पढ़ाई होते हुए मिली जबकि संचालक का कहना था कि एक ही स्कूल में पढ़ाई हो रही है, उनका यह दावा भी गलत निकला। यह गैर जिम्मेदारी क्यों - यह संस्था क्षेत्र के लोगों के शिक्षण का कार्य करती है। इससे आमजन प्रभावित है। कोरोना काल में बच्चों ही नहीं ग्रामीणों को कोराेना पर शिक्षण कार्य कराना चाहिए न कि इस तरह कक्षाएं लगानी चाहिए।

संस्था के संस्थापक बोले- बच्चे आ जाते हैं तो स्टाफ पढ़ा देता है, गांवों में कोरोना का संक्रमण कम है

निर्वाण वन फाउंडेशन के संस्थापक निर्वाण बोधिसत्व का कहना है कि हमने ऑफिशियल रूप से बच्चों के लिए स्कूल बंद किया हुआ है। सिर्फ स्टाफ आता है। बच्चों को लाने व ले जाने के लिए जो बस लगा रखी है, वह भी बंद है। हम बच्चों से फीस भी नहीं लेते। डड़ीकर गांव के आसपास से करीब 20 बच्चे पैदल चलकर अंग्रेजी पढ़ने के लिए आ जाते हैं तो स्टाफ उन्हें बैठाकर पढ़ा देता है। वैसे भी गांवों में कोरोना का संक्रमण कम है।