अलवर के सरिस्का में गूंज रहा कलरव:टहला के थाई एनिकट पर विदेशी पक्षी बार हैडेड गूज का डेरा, एक ही क्षेत्र में 800 से अधिक पक्षी

अलवर के सरिस्का में गूंज रहा कलरव:टहला के थाई एनिकट पर विदेशी पक्षी बार हैडेड गूज का डेरा, एक ही क्षेत्र में 800 से अधिक पक्षी

सरिस्का के जंगल में टहला रेंज के देवरी बाड़ा के थाई एनिकट पर बार हैडेड गूज ने डेरा डाल लिया है। इस एनिकट पर 800 से अधिक बार हैडेड गूज का कलरव और अटखेलियां आकर्षित कर रही हैं, जबकि सरिस्का के ज्यादातर वाटर पॉइंट सूने पड़े हैं। सरिस्का के एसीएफ पंकज कुमार मीना बताते हैं कि ये दक्षिण एशिया के मंगोलिया, कजाकिस्तान, रूस व तिब्बत क्षेत्र से पलायन कर दिसंबर में यहां पहुंचते हैं। इन प्रवासी पक्षियों ने एनिकट के आसपास पेड़ों और चट्टानों पर डेरा डाला हुआ है। ये पक्षी झुंड में ही रहते हैं और एक साथ घोंसला बनाते हैं। और मौसम में बदलाव के बाद फरवरी मार्च में लौट जाएंगे।

28 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरने में सक्षम

  • सबसे ज्यादा ऊंची 28 हजार फीट तक उड़ान भरने वाला यह पक्षी एक दिन में 1600 किमी की दूरी तय करने में सक्षम है।
  • ये ज्यादातर वाटर पॉइंट के पास अपना ठहराव करते हैं और वहीं घोंसला बनाते हैं।
  • मादा एक बार में 4 से 6 अंडे देती है। 27 से 30 दिन में अंडे से चूजे बाहर निकल आते हैं।
  • इन पक्षियों के बच्चे दो महीने में उड़ान भरने लायक हो जाते हैं। इसके बाद ये अपने मूल स्थान के लिए रवाना होते हैं।