गैंगस्टर आनंदपाल का भाई मंजीत पाल सिंह अलवर जेल से रिहा हुआ, करीब एक दर्जन गाड़ियों का काफिला मंजीत पाल सिंह को लेने अलवर पहुंचा
चूरू जिले के सुजानगढ़ इलाके के बहुचर्चित गनोड़ा हत्याकांड में अलवर जेल में बंद गैंगस्टर आनंदपाल का भाई मंजीत पाल सिंह साेमवार काे अलवर की जिला जेल से रिहा हाे गया। इस हत्याकांड में हाईकाेर्ट से बरी हाेने के बाद साेमवार काे मंजीत के समर्थक अलवर पहुंचे अाैर जेल से छूटने के बाद उसे अपने साथ ले गए। इस मामले में 6 आराेपी थे, हाईकाेर्ट से सभी आराेपी बरी हाे गए। इससे पहले निचली अदालत से उन्हें आजीवन कारावास की सजा हुई थी। मंजीत पाल को लेने करीब एक दर्जन से गाड़ियों का काफिला अलवर पहुंचा था।
इन गाड़ियों में मंजीत के समर्थक सवार थे। समर्थकों ने मंजीत की जेल से रिहाई के बाद जमकर नारेबाजी भी की। समर्थकों में कुछ गनमैन थे, जिनके पास बंदूक थी। मंजीत को सोमवार शाम करीब 4 बजे अलवर जेल से रिहा किया गया।
अलवर जेल अधीक्षक संजय यादव ने बताया कि मंजीत करीब डेढ़ साल से अलवर जेल में बंद था। हाईकाेर्ट ने इस मामले में सभी छह आराेपियाें काे शुक्रवार काे बरी कर दिया था। निचली अदालत में मुचकले भरने के बाद साेमवार काे मंजीत जेल से रिहा हाे गया। मंजीत कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह का छोटा भाई है। करीब 3 साल पहले चूरू जिले की सुजानगढ़ एडीजे कोर्ट ने सभी आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
राजस्थान हाईकोर्ट ने मंजीत पाल सिंह सहित रामसिंह, मोंटी सिंह, कैलाश दान, महावीर सिंह और छोटू सिंह को प्रॉसिक्यूशन अपराध को साबित करने में जरूरी साक्ष्य समझाने में विफल रहने पर बरी कर दिया। इस मामले में रामसिंह और मंजीत जेल में बंद थे। मोंटी सिंह, कैलाशदान, महावीर सिंह और छोटू सिंह जमानत पर चल रहे हैं। बहुचर्चित जीवन गोदारा हत्याकांड में मंजीत करीब 3 साल पहले ही बरी हो चुका है। वहीं, लाडनूं के खेराज हत्याकांड में उसे जमानत मिल चुकी है।
आनंदपाल की बेटी भी अलवर आई, रिहाई के बाद साफा पहनाकर किया स्वागत
मंजीत पाल सिंह के रिहा हाेने के बाद आनंदपाल की बेटी याेगिता सिंह भी अलवर अाई। जेल से बाहर आने के बाद समर्थकों ने आंनदपाल सिंह के पक्ष में नारेबाजी की। इस दाैरान राजपूत करणी सेना की ओर से मंजीत काे साफा पहनाकर स्वागत किया गया। इस दाैरान दीपक तंवर, गजेंद्र नरूका, देवेंद्र सिंह चाैहान, विक्रम सिंह चाैहान सहित अनेक लाेग माैजूद थे। समर्थक मंजीत पाल काे टाेल टैक्स तक छाेड़कर आए। इससे पहले मंजीत शहर काेतवाली तक भी गए थे। मंजीत की सुरक्षा काे देखते हुए गनमैन भी साथ आए थे।
क्या था मामला
29 जून 2011 को कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल और उसके 10 साथियों ने सुजानगढ़ के भोजलाई चौराहा पर फायरिंग की थी। नानूराम शेरड़िया को 9 गोलियां लगी थीं। फायरिंग की घटना के बाद सभी आरोपी 9 किलोमीटर दूर स्थित गनोड़ा गांव के शराब ठेके पर गए। वहां उन्होंने राकेश जाट की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। फायरिंग में घायल हुआ नानूराम जिंदा बच गया था। तब इस मामले में 11 आरोपियों में से विक्की सिंह को फरार घोषित किया गया था। एडीजे कोर्ट में उस पर अलग से ट्रायल चल रहा है। जबकि गैंगस्टर आनंदपाल सिंह, बलबीर बानूड़ा और रामधन फौजी की मौत हो चुकी है।


