हार्ट-न्यूरो की बीमारियां भी 15% कम, प्रसव में 20 हडि्डयां टूटने जितना दर्द सह जाती है मां

हार्ट-न्यूरो की बीमारियां भी 15% कम, प्रसव में 20 हडि्डयां टूटने जितना दर्द सह जाती है मां

दुनिया का सबसे खूबसूरत शब्द है मां...क्योंकि मेडिकल रिसर्च में है 45 डेल (दर्द नापने का पैमाना) से अधिक का दर्द कोई भी ‘मर्द’ नहीं झेल पाता है और मौत हो जाती है, लेकिन ‘मां’ 57 डेल का दर्द (20 हडि्डयों के बराबर) बर्दाश्त कर नन्हीं जान को संसार में लाती है।

बात करें महिलाओं के स्वास्थ्य की तो बीमारियों में भी वो अधिक ‘सहनशील’ हैं। इसका कारण लिंबिक इमोशन हैं। केयरिंग होने और एस्ट्रोजन हार्मोन की अधिक सक्रियता से कैंसर और हार्ट जैसी बीमारियों को भी ये मात दे रही हैं। इन बीमारियों में पुरुषों के मुकाबले रिकवरी रेट 13.9 फीसदी तक अधिक है।

लिबिंक इमोशन यानी सुख-दुख में साथ देने वाली महिलाएं रोगों से मजबूती से लड़ती हैं

40 की उम्र तक महिलाओं में दिल की बीमारियां भी आधी

  • सरकुलेशन जनरल में प्रकाशित नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट यूएसए की रिपोर्ट के अनुसार 40 साल तक फीमेल में पुरुषों के मुकाबले हार्ट डिजीज 50% होता है।
  • 40 से 60‌ साल की उम्र में पुरुषों में यह डेढ़ गुना अधिक है, 60 साल के बाद जाकर बीमारी का स्तर समान होता है।

हार्मोनल, बायोलॉजिकल व जेनेटिकली अधिक स्ट्रॉन्ग

  • बायोलॉजिकल: इंसानों में महिलाएं 8% , मेमल्स में 18 और लाइन्स में 50% लंबी लाइफ है।
  • जेनेटिकल: मेल में एक्सवाई जीन होते हैं और फीमेल में डबल एक्स। ये डबल एक्स प्रोटेक्टेड करते हैं। स्ट्रेस-स्ट्रेन मजबूत होते हैं।
  • हार्मोनल: मेल में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन इम्यूनिटी कम करता है और हार्ट/डायबटिज के कॉम्प्लीकेशन बढ़ाता है। महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन तोहफा है। हार्ट डिजीज कम करता है, गुड कॉलेस्ट्रोल बढ़ाता है। आंतों को ठीक रखता है। एंटी ऑक्सीडेंट का काम करता है।