धौलपुर-भरतपुर समेत 18 जिलों में जांच से गैस एजेंसियों में हडकंप.... काेराेनाकाल में मिले तीन मुफ्त सिलेंडर भी जांच के दायरे में
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट उज्जवला योजना का काला सच अब बाहर आ रहा है। गैस कनेक्शनों की हुई बंदरबांट अब गैस डीलर्स के गले में फांस बन रही है। प्राथमिक जांच में पता चला है कि करीब 8 हजार कनेक्शनों पर कोरोनाकाल में 3 मुफ्त सिलेंडर भी लिए गए थे। यह सिलेंडर मोदी सरकार ने कोरोना की विषम आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए पात्र उज्जवला परिवारों को दिए थे।
उल्लेखनीय है कि जिले में 2.40 लाख उज्जवला कनेक्शन हैंं। इनमें करीब 60 हजार कनेक्शन ऐसे हैं, जो नियमों के खिलाफ दिए गए हैं। यानी कनेक्शनधारी के पारिवारिक सदस्यों के आधार कार्ड लिंक नहीं किए गए। केवल एक महिला के आधार पर ही कनेक्शन जारी कर दिया गया। अब ऐसे परिवारों के आधार कार्ड जुटाए जा रहे हैं। तमाम कोशिशों के बाद भी करीब 30 हजार कनेक्शनों के आधार कार्ड लिंक करने की कार्रवाई पूरी नहीं हा़े पाई है।
अधिकारी आज देंगे रिपाेर्ट
मूल्यांकन संगठन ने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत जारी गैस उपभोक्ताओं की जांच के लिए राकेश कुमार सिंघारिया और पवन कुमार मीणा को लगाया है। धौलपुर जिले में भूपेंद्र शर्मा एवं सौरव लिग्री को जांच सौंपी गई है। पिछले 3 दिन में इस टीम ने डीग, नगर, रूपवास, भरतपुर, बाड़ी, धौलपुर में जांच की है।
18 जिलों में हो रही हैं जांच
- भरतपुर/धाैलपुर समेत 18 जिलों में उज्जवला गैस कनेक्शनों की जांच चल रही है। सभी डीलर्स उज्ज्वला कनेक्शनधारी परिवार के आधार कार्डों को जोड़ रहे हैं। कोरोनाकाल में कुछ लोगों द्वारा गलत तरीके से 3 सिलेंडर मुफ्त लेने या देने की जानकारी मुझे नहीं है। सब कुछ ऑनलाइन है। - रघुराजसिंह, अध्यक्ष, भरतपुर एलपीजी डीलर्स एसाेसिएशन


