संत समाज और भाजपा का दावा आदिबद्री और कनकांचल क्षेत्र में राज्यमंत्री जाहिदा के बेटे की खानें हैं, राजनीतिक दबाव में नहीं रोका गया खनन
आदिबद्री और कनकांचल समेत बृज के पहाड़ों को बचाने के लिए बाबा विजयदास के बलिदान का मामला तूल पकड़ रहा है। भाजपा, साधु-संत और स्थानीय लोग आत्मदाह जैसा कदम उठाने के लिए राज्य सरकार और स्थानीय जिला प्रशासन के अफसरों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। आरोप है कि इस क्षेत्र में राज्यमंत्री जाहिदा खान के बेटे साजिद खान की दो खनन लीज हैं। कुछ अन्य नेता और अफसर भी प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं।
इसलिए सरकार की सैद्धांतिक सहमति के बावजूद वन क्षेत्र घोषित करने का नोटिफिकेशन 9 महीने तक नहीं हो पाया। भाजपा की हाईलेवल जांच कमेटी ने पूरे मामले की सीबीआई जांच कराए जाने की मांग की है। वहीं कामां के सामाजिक कार्यकर्ता विजय मिश्रा ने भी जाहिदा खान, उनके बेटे और प्रशासनिक अफसरों के खिलाफ खोह थाने में लिखित शिकायत दी है।
इसमें इनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है। इधऱ, भाजपा की हाई लेवल कमेटी ने रविवार को रविवार को पसाेपा, आदिबद्री, खनन क्षेत्र और बरसाना समेत कई स्थानों का दौरा किया। आंदोलन से जुडे़ रामेश्वर बेंसला, माेहनसिंह, केसरसिंह, बरसाना में राधाकांत शास्त्री से बात करके तथ्य जुटाए।
प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह ने कहा कि सरकार और जिला प्रशासन ने साधु-संताें को डरा-धमकाकर ऐसे हालात बना दिए जिससे संत विजयदास को आत्मदाह करना पड़ा। बाबा जब अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे थे तब उनके और टावर पर चढ़ने वाला बाबा नारायणदास के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
प्रशासन की सफाई...संतोंं ने आत्मदाह स्थगित करने का भरोसा दिलाया था, फिर भी टावर पर चढ़े, खुद को आग लगाई
साधु-संतों ने पीएम को 3 सूत्री मांग पत्र, बाबाओं के खिलाफ एफआईआर रद्द हो
बृज क्षेत्र के साधु-संतों ने 2 माह बाद फिर लोकतांत्रिक तरीके से शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। इस संबंध में बृज पर्वत एवं पर्यावरण संरक्षण समिति की ओर से पीएम नरेंद्र मोदी को 3 सूत्री मांग पत्र भेजा गया है। इनमें आदिबद्री और कनकाचल पर्वतों को खनन मुक्त करने की फाइल 9 महीने तक अटकाकर खनन माफिया की मदद करने वाले अफसरों पर कार्रवाई, बाबा नारायणदास और विजयदास के खिलाफ एफआईआर रद्द करने एवं लीज रद्द कर खनन क्षेत्र से मशीनरी को तुरंत हटवाने की मांग की गई है। समिति के अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री ने बताया कि बाबा विजयदास के आत्मदाह से पूरा संत समाज आहत है। क्योंकि आंदोलन को दबाने के लिए जिला प्रशासन के अफसर एफआईआर दर्ज कर बाबाओं पर नाजायज दबाव बना रहे थे।
बाबा विजयदास ने 3 दिन पहले दी थी आत्मदाह की चेतावनी
अपनी कार्यशैली एवं लापरवाही को लेकर जिले पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी कटघरे में हैं। जिला प्रशासन की ओर से रविवार को मीडिया में जारी तथ्यात्मक रिपोर्ट में माना गया है कि बाबा विजयदास उन 10 संतों में शामिल थे जिन्होंने 17 जुलाई को ज्ञापन देकर बाबा हरिबोल के साथ 19 जुलाई को आत्मदाह करने की चेतावनी दी थी। लेकिन, 18 जुलाई को पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह के साथ मीटिंग में मांगों पर समझौता हो गया था। विजयदास समेत वार्ता में आए सभी लोगों ने आत्मदाह स्थगित करने का भरोसा दिलाया था। इसलिए प्रशासन निश्चिंत था। फिर भी बाबा नारायण दास टावर पर चढ़े और विजयदास ने खुद को आग लगा ली थी।
आदिबद्री में भी पेड़ पर चढ़ गया था साधू, वार्ता स्थल बदलना पड़ा
जिला प्रशासन की तथ्यात्मक रिपोर्ट के मुताबिक 19 जुलाई को टावर पर चढ़े बाबा नारायणदास को नीचे उतारने के प्रयासों के तहत जिला कलेक्टर आलोक रंजन डीग के आदिबद्री में साधुओं से बात करने गए थे। लेकिन, बातचीत शुरू होने से पहले वहां भी एक साधू पेड पर चढ़ गया था। इससे अफसरों के हाथ-पांव फूल गए। तुरंत वार्ता स्थल बदलकर खोह थाना किया गया। इस तथ्य को भी नजरअंदाज किया गया।
भाजपा ने एक ही मामले के लिए बनाई दो जांच कमेटी
ईआरसीपी पर घिरी भाजपा अब इस मुद्दे को भुनाना चाहती है। संभवतः यही वजह है कि इस मामले की जांच के लिए दो कमेटियां बना दी गईं। इनमें एक प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया ने सांसद बालकनाथ के नेतृत्व में बनाई है। जबकि दूसरी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह के नेतृत्व में बनाई है।
जिला प्रशासन ने अपनाए गलत हथकंडे, एफआईआर हो : मिश्रा
इधऱ, सामाजिक कार्यकर्ता विजय मिश्रा ने खोह पुलिस को ऑनलाइन शिकायत भेजी है। इसमें कहा है कि आंदोलन को खत्म कराने के लिए साधुओं को डराया-धमकाया गया। क्योंकि इस इलाके में राज्यमंत्री जाहिदा खान के बेटे साजिद की दो खानें हैं। करीब 15 दिन पहले दी गई आत्मदाह की चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया गया।


