अंतरराज्यीय चोर गिरोह पकड़ाया पेट्रोल मिक्स डीजल से 120 की स्पीड में दौड़ाया ट्रक, मालिक ने 3000 किमी पीछा कर पकड़ा
भरतपुर के एक ट्रक मालिक ने 4 दिन तक करीब 3000 किलोमीटर तक पीछा करके जयपुर पुलिस की मदद से यूपी में चंदोली के पास अंतरराज्यीय चोर गिरोह को पकड़वाया है। इसमें शामिल हरियाणा के चरखी दादरी निवासी बाप-बेटे दिनेश और प्रशांत इतने शातिर हैं कि डीजल में पेट्रोल-मिलाकर ट्रकों को भी 100 से 120 की स्पीड पर दौड़ाते थे। अगर पुलिस पीछा भी कर रही हो तो पकड़े नहीं जाएं, इसलिए गूगल नेविगेशन की सहायता से रूट बदल-बदलकर बिहार के सासाराम जिले में पहुंच जाते और वहां चोरी के ट्रकों को 2.50 से 3 लाख रुपए बेच देते थे।
इस गिरोह के तार बांग्लादेश से भी जुड़े हैं। अब तक की पूछताछ से पता चला कि चोर गिरोह से जुड़े बाप-बेटे जयपुर, भरतपुर और पूर्वी राजस्थान में पहले ट्रक ड्राइवर और कंडक्टर से दोस्ती करते थे। फिर उन्हें नशीला पदार्थ खिलाकर ट्रक चुराकर ले जाते थे। ट्रक मालिक अनुराग तमरोली के मुताबिक भरतपुर से 6 फरवरी को शराब के पव्वे लेकर गंगा नगर शुगर मिल के गोदाम पर जयपुर गया था।
अनलोडिंग के इंतजार में खड़ा यह ट्रक 8 फरवरी की रात में चोरी हो गया। उन्हें इसका पता तब चला जब उनके पास दिल्ली रोड के टोल प्लाजा से टोल टैक्स कटने का मैसेज आया। इससे उनका माथा ठनका। उन्होंने ड्राइवर-कंडक्टर संजय प्रेमी और अतर सिंह को फोन लगाया तो उनके फोन स्विच ऑफ थे। इसके कुछ देर बाद ही मोबाइल पर फिर टोल टैक्स कटने का दूसरा मैसेज आया। इससे शक यकीन में बदल गया कि ट्रक चोरी हो गया है। इस पर उन्होंने तुरंत जयपुर पुलिस को सूचना दी और दोस्तों को साथ लेकर खुद भी जयपुर के लिए रवाना हो गए।
इसी दौरान होश में आने के बाद ट्रक ड्राइवर का भी फोन आ गया। उसने बताया कि ट्रक चोरी हो गया है। अनुराग सिंह मुरलीपुरा थाने की पुलिस को लेकर ट्रक के पीछे-पीछे दौड़े और 4 दिन की अथक मेहनत के बाद ट्रक को यूपी में चंदोली पुलिस चौकी सैयद राजा के पास से पकड़ लिया। इसके साथ ही ट्रक चुराने वाले आरोपी दिनेश और प्रशांत को भी पकड़ लिया। ये दोनों बाप बेटे हैं। पुलिस इन्हें ट्रांजिट रिमांड पर जयपुर ले आई है। इस ऑपरेशन में एडिशनल कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर राहुल प्रकाश का काफी सहयोग रहा। क्योंकि उन्होंने उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार तक लगातार नाकाबंदी कराई।

हर मोड़ पर रूट बदल देते थे ट्रक चोर
ट्रक चोर टेक्निकल रूप से भी शातिर हैं। मुस्तगीस अनुराग सिंह ने बताया कि जब वे इनका पीछा कर रहे थे तो ये हर मोड़ पर ट्रक की दिशा बदल देते थे। क्योंकि ये गूगल नेवीगेशन की मदद से आगे बढ़ रहे थे। इनकी स्पीड औसतन 100 से 120 रहती थी। क्योंकि ये डीजल में पेट्रोल मिलाकर ट्रक दौड़ा रहे थे। ट्रक के नंबरों से मामूली छेड़छाड़ करने के साथ ही ट्रक पर लिखे मालिक या कंपनी के मोबाइल नंबरों को भी बदलने या मिटाने का प्रयास करते थे। लेकिन, ट्रक के नंबरों को डिस्टर्ब नहीं करते थे क्योंकि गाड़ियों में अक्सर ओरिजिनल कागजात रहते हैं। इसलिए इन्हें कहीं दिक्कत नहीं आती थी।
निजी गाड़ी से करते थे रैकी
मुरलीपुरा थाने के एएस आई डालचंद ने बताया कि चोर बाप-बेटे से एक प्राइवेट गाड़ी भी बरामद की गई है। उनकी यह गाड़ी चुराए गए ट्रक के पीछे पुलिस की रैकी करते हुए चलती थी।
सिर्फ 12 पहिया वाले ट्रक ही चुराते थे चोर
प्राथमिक पूछताछ में पता चला है कि इस गिरोह के तार बांग्लादेश से भी जुड़े हैं। ये लोग राजस्थान दिल्ली हरियाणा से 12 पहिया वाले ट्रक ही चुराते हैं। उन्हें बिहार के सासाराम जिले में ले जाकर बेचते थे। इन ट्रकों की बांग्लादेश में डिमांड रहती है, क्योंकि ये वहां पत्थर ढोने के काम आते हैं।


