जैसा दाम वैसा काम: 8 साल पुराने रेट से 37 लाख में बनती आधा किमी सड़क, अब 26 लाख में दिया ठेका, घटिया सड़कें ही बनेंगी

जैसा दाम वैसा काम: 8 साल पुराने रेट से 37 लाख में बनती आधा किमी सड़क, अब 26 लाख में दिया ठेका, घटिया सड़कें ही बनेंगी
नगर निगम के अफसरों ने इसका टेंडर 26 लाख में रुपए में ही दे दिया। इसमें भी संबंधित ठेकेदार पर इस सड़क के 3 साल तक रखरखाव का जिम्मा और है।

राजेंद्र नगर में विनोद गुप्ता हॉस्पिटल से नगर निगम आयुक्त के बंगले तक आधा किलोमीटर की सड़क में घटिया सामग्री के नमूने लिए जाने के बाद नगर निगम के इंजीनियर, अफसरों और ठेकेदारों में हड़कंप है। क्योंकि वर्ष 2013 की बीएसआर (बेसिक शेड्यूल रेट) के हिसाब से ही यह सड़क 37 लाख रुपए में बननी चाहिए थी। नगर निगम के अफसरों ने इसका टेंडर 26 लाख में रुपए में ही दे दिया। इसमें भी संबंधित ठेकेदार पर इस सड़क के 3 साल तक रखरखाव का जिम्मा और है।

इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस सड़क क्वालिटी कैसी होगी। जबकि वर्ष 2013 के बाद तो सभी चीजों पर महंगाई बढ़ी है। इसमें रोचक तथ्य यह है कि नगर निगम के इंजीनियर जांच रिपोर्ट आने से पहले ही दावा कर रहे हैं कि सभी नमूने जांच में 100 प्रतिशत पास होंगे।

चिकित्सा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग के इलाके में हो रही इस हेराफेरी में कितने लोग शामिल हैं। अगर इसकी ठीक से जांच हुई तो कई इंजीनियरों और अफसरों की नौकरी पर तलवार लटक सकती है। क्योंकि शहर में इस समय 8 अन्य सड़कों का काम चल रहा है। उनमें भी ऐसी ही हेराफेरी हो रही है। उल्लेखनीय है कि रविवार को शहर के दौरे पर निकले चिकित्सा राज्यमंत्री डॉ. गर्ग ने जब राजेंद्र नगर की इस सड़क में घटिया सामग्री का इस्तेमाल होते देखा तो उन्होंने मौके पर ही अफसरों को लताड़ा और खुद खड़े रहकर नमूने भरवाए थे।

गजब का भरोसा- चिकित्सा राज्यमंत्री सुभाष गर्ग ने खुद भरवाए थे सैंपल, इंजीनियर बोल रहे- जांच रिपोर्ट एकदम सही आएगी

  • सड़क की लंबाई- करीब 500 मीटर
  • बीएसआर से लागत- 37 लाख रुपए
  • ठेका छूटा - 26 लाख रुपए में
  • ठेकेदार फर्म- चौधरी कंस्ट्रक्शन
  • काम शुरू होने की तारीख- 14 अक्टूबर 20
  • पूरा होने की निर्धारित तारीख - 13 जून 21

शहर में खराब बनने वाली सड़कों के लिए ये लोग हैं जिम्मेदार

  • पवन तिवारी जेईएनः क्वालिटी कंट्रोल इन्हें ही देखना था
  • ये है मामला: राजेंद्र नगर की जिस सड़क के नमूने लिए गए उसकी क्वालिटी, काम को समय पर पूरा करवाने समेत तमाम जिम्मेदारी इन्ही की है।
  • अब क्या कहते हैंः एक्सीडेंट होने के काऱण मैं छुट्टी पर हूं। मैं जब तक ड्यूटी पर था, तब तक काम मापदंडों के अनुरूप ही हुआ है। इसके बाद कमुझे नहीं पता।
  • विनोद चौहान, एक्सईएनः सभी निर्माण कामों के लिए तकनीकी रूप से जिम्मेदार

ये है मामला: निगम क्षेत्र में होने वाले सभी तरह के निर्माण कार्यों के लिए ये ही जिम्मेदार हैं। उनकी क्वालिटी, टाइम पीरियड आदि के टेंडर से लेकर मॉनीटरिंग तक सभी काम इन्हें देखने होते हैं।

अब क्या कहते हैंः वैसे तो रेट का क्वालिटी से कोई संबंध नहीं है। ठेकेदार को तय मापदंडों के अनुसार ही काम करना होता है। हम न्यूनतम दर पर टेंडर देने के लिए बाध्य हैं। शहर में 8-10 जगह सडकों पर सीलकोट के काम चल रहे हैं। अभी बारिश शुरू नहीं हुई है। इसलिए सड़कों को कोई खतरा नहीं है। जांच के लिए राजेंद्र नगर की सड़क के सैंपल ले लिए हैं।

राजेश गोयल, आयुक्त ननि: सभी कामों के लिए प्रशासनिक तौर पर जिम्मेदार

ये है मामला: निगम के अधीन होने वाले कामों और उनके भुगतान आदि के लिए प्रशासनिक तौर पर यही जिम्मेदार हैं। शिकायतों की जांच और उन पर कार्रवाई करना भी इन्हीं के क्षेत्राधिकार में है.

अब क्या कहते हैंः राज्यमंत्री डॉ. गर्ग के निर्देश पर ही राजेंद्र नगर में बन रही सड़क से नमूने ले लिए थे। नियमों में इनकी 2 जगह से ही जांच कराए जाने का प्रावधान है। हम 3 जगह पीडब्ल्यूडी, इंजीनियरिंग और एमएनआईटी से जांच कराएंगे। तीसरी जांच थर्ड पार्टी होगी। तकनीकी जानकारी के लिए एक्सईएन विनोद चौहान से बात करें।

घोटाले की आशंक; ठेकेदार का जिम्मा फिर भी विकास फंड से हो रही मेंटीनेंस

भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि मिलीभगत से ठेकेदारों को पूरा भुगतान हो जाता है। बाद में नगर निगम उन्हीं सड़कों की डवलपमेंट फंड और राज्य वित्त आयोग के मद से मेंटीनेंस करवाता रहता है। ये हेराफेरी पकड़ में न आए, इसलिए सड़कों की मरम्मत को नाले, नालियों, पार्क आदि कामों के साथ जोड़ दिया जाता है।

इधर, निगम के अकाउंट्स ऑफिसर पंकज गुप्ता के मुताबिक निगम के पास सड़कों की मेंटीनेंस के नाम से अलग कोई बजट हैड नहीं है। क्योंकि जो भी नई सड़कें बनती हैं, उनके टेंडर में ही संबंधित ठेकेदार की 3 से 5 साल तक रखरखाव की भी जिम्मेदारी होती है।

इनफॉरमेशन टू इनसाइड​​​​​​​

पूर्व मंत्री के बेटे का करीबी है ठेकेदार, इसीलिए लिए गए सड़क के नमूने

यह मामला पिछले 2 दिन से राजनीतिक हलकों में भी चर्चित है। माना जा रहा है कि चिकित्सा राज्यमंत्री डॉ. गर्ग ने उसके द्वारा बनाई जा रही सड़क के काम के इसलिए नमूने भरवाए, चूंकि वह राजनीतिक तौर पर पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह के परिवार से जुड़े हैं। डॉ. गर्ग जाहिरा तौर पर पूर्वमंत्री विश्वेंद्र सिंह और उनके परिवार के राजनीतिक विरोधी के तौर पर देखे जाते हैं। हालांकि यह गर्ग को चुनाव जितवाने में पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह का काफी योगदान रहा था।

पूर्वमंत्री विश्वेंद्र सिंह भी जिला प्रशासन की मीटिंग में उठा चुके ब्लो टेंडर का मुद्दा

शहर में सड़कों और दूसरे कामों के बीएसआर रेट से 30-40% से भी ज्यादा ब्लो दिए जाने को लेकर पिछले दिनों जिला प्रशासन की मीटिंग में पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने भी मुद्दा उठाया था। उनका कहना था कि ब्लो टेंडर देने वालों पर प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि घटिया क्वालिटी के कारण सड़कें बार-बार टूटती हैं और इनमें पब्लिक का पैसा बर्बाद होता है।

सीधी बात - वैभव चौधरी, प्रोप. चौधरी कंस्ट्रक्शन

मंत्रीजी ने सीलकोट को गलती से काला पाउडर समझ लिया

आपने बीएसआर से भी कम रेट में टेंडर लिया है, क्वालिटी कैसे मेंटेन होगी?
-मशीनरी खुद की होने से किराया नहीं लगता। कंपीटीशन का टाइम है। किसी काम में दो पैसे ज्यादा खर्च होते हैं तो कहीं 4 पैसे बच भी जाते हैं।
आपने राजेंद्र नगर की सड़क में घटिया सामग्री क्यों लगाई ?
-घटिया सामग्री नहीं है। निगम के मापदंडों के अनुसार ही सड़क बनी है।
फिर, मंत्री जी को क्यों लगा कि घटिया सड़क निर्माण बन रही है?
-वहां सड़क पर सील कोट चल रहा था। उन्होंने भ्रमवश काला पाउडर समझ लिया।

हमारे पास डामर सड़कों की जांच सुविधा ही नहीं है

हमारे पास डामर सड़कों की जांच करने संबंधी उपकरण ही नहीं है। हम तो केवल सीसी और इंटरलॉक सड़कों की जांच करते हैं। एक साल में कितने सैंपल जांचे। उनमें कितने फेल हुए, मुझे कुछ याद नहीं है।
आशीष मोर्य, प्रभारी, रोड लैब