एसीबी का टच एंड गो: डीजी अब बोले-अफसरों ने गुमराह नहीं किया, परिजन इलाज कराना चाहते थे, इसलिए छोड़ा

एसीबी का टच एंड गो: डीजी अब बोले-अफसरों ने गुमराह नहीं किया, परिजन इलाज कराना चाहते थे, इसलिए छोड़ा
बीएल सोनी, डीजी, एसीबी

आरबीएम अस्पताल के घूसखोर डॉक्टर को पकड़ने के 12 घंटे में ही छोड़ने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के डीजी बीएल सोनी ने फिर स्टेटमेंट बदला है। डॉक्टर की ट्रैप कार्रवाई को अंजाम देने वाले डिप्टी एसपी और टीएलओ से पूछताछ के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें गुमराह नहीं किया गया। मातहत अफसरों ने परिस्थितिवश सही काम किया।

उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज करने के साथ ही जांच एडिशनल एसपी महेश मीणा को सौंपी है। इधर, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने सीएम अशोक गहलोत को 2 पेज की चिट्ठी लिखी है। इसमें डीजी बीएल सोनी की बातचीत का हवाला देते हुए बताया कि 7 अगस्त को भरतपुर संभाग में कोरोना का एक भी केस एक्टिव नहीं था। डॉ. गुप्ता दूसरी बार पैसे लेते हुए गिरफ्तार हुए हैं। उन्हें 12 घंटे में ही मुक्त करना उचित नहीं है। गंभीर अनियमितताओं की जांच करके दोषी अधिकारियों पर की गई कार्रवाई से मुझे और प्रदेश की जनता को अवगत कराएं।

भाजपा नेता गुलाब चंद कटारिया ने सीएम को लिखी चिट्ठी, बोले-7 अगस्त को भरतपुर संभाग में कोरोना का एक भी एक्टिव केस नहीं था

भरतपुर के अफसरों का तर्क- मुिल्जम छोड़ने से गुनाह कम नहीं हो जाता
मंगलवार को एसीबी मुख्यालय में डीजी बीएल सोनी ने भरतपुर के डिप्टी एसपी परमेश्वर यादव और टीएलओ नवल किशोर से केस की पूरी जानकारी ली। उन्होंने डीजी को बताया कि डॉक्टर की तबियत खराब होने पर उसकी पत्नी ने कहा था कि इनका हार्ट का ऑपरेशन हो रखा है। इन्हें हमें दे दो हम अपने हिसाब से इलाज कराएंगे। अगर हम अस्पताल में ले जाते और वहां डॉक्टर नहीं मिलता तो? उस दिन जो परिस्थितियां थी उसमें उन्हें जो बेस्ट लगा वो उन्होंने किया। बदनीयति से कुछ नहीं किया और ना ही किसी के कहने से छोड़ा। मुल्जिम को छोड़ने से उसका गुनाह कम नहीं हो जाता।

भ्रष्ट डॉक्टरों के रेट...जांच और ऑपरेशन के 2-10 हजार रुपए
आरबीएम और जनाना के डॉक्टरों द्वारा रोगियों से पैसे मांगने की लगातार शिकायतें आ रही हैं। इनका रेट 2 से 10 हजार रुपए चल रहा है। पिछले एक माह में ही एसीबी में दो ट्रैप कर चुकी है। इनमें डॉक्टर अनिल गुप्ता के अलावा 9 जुलाई को जनाना के स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. सुनील मीणा को ट्रैप करने का प्रयास हुआ। लेकिन, वह चकमा देकर भाग गया। उस पर बच्चेदानी के ऑपरेशन के 5 हजार रुपए मांगने का आरोप था। लेकिन, उसके दलाल कंप्यूटर ऑपरेटर को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। इसी तरह 15 वर्षीय बालक नरेश की नाक में मस्से का ऑपरेशन के लिए ईएनटी डा. प्रियंका अग्रवाल समेत दो डाक्टरों की 10 से 15 हजार रुपए मांगने की शिकायत हुई थी। डॉ. प्रियंका पर तो आरबीएम के ही रिटायर यूडीसी केके शर्मा ने भी बेटे को अस्पताल के बजाय 200 रुपए लेकर घर पर देखने का आरोप लगाया था।

सीधी बात बीएल सोनी, डीजी, एसीबी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है 7 साल तक की सजा वाले केस में गिरफ्तार मत करो

सवाल - आपने गुमराह करने वाले अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की?
जवाबः मानवीय दृष्टिकोण से अधिकारियों ने सही काम किया। कोई बीमार है और परिजन कहें कि वे इलाज कराना चाहते हैं तो हम जिद नहीं कर सकते। कोई कैजुअल्टी हो जाती तो। छुट्टी के दिन हम अस्पताल ले जाते और वहां डॉक्टर नहीं मिलता तो।

सवाल - लेकिन, ऐसा तो पहले कभी नहीं हुआ?
जवाबः दुनिया में कोई चीज पहली बार भी होती है। जो हुआ उसके लिए मैं जिम्मेदार हूं। किसी के कहने पर छोड़ने का सबूत दें तो मैं मानूंगा की मैलाफाइड इंटेंशन से किया गया।

सवाल - व्यक्ति झूठ बोल सकता है परिस्थितियां नहीं। केस में हालात गवाही दे रहे हैं गलत हुआ है?
जवाबः सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 7 साल तक की सजा वाले केस में गिरफ्तारी मत करो। कोरोना से जेलों में मौतें हो रही है। खैर, मैं इसमें नहीं जाना चाहता।