जाेड़ा बनाने की जुगत में एक पेड़ की डाल पर जुटे 46 ग्रीन पीजन

जाेड़ा बनाने की जुगत में एक पेड़ की डाल पर जुटे 46 ग्रीन पीजन

जाेड़ा बनाने की जुगत में एक पेड़ की डाल पर जुटे 46 ग्रीन पीजन
अंडों और बच्चों को बड़ा करने में दोनों मिलकर काम करते हैं।

भरतपुर: मौैसम में बदलाव के साथ ही पक्षियों में नए जीवन साथी की तलाश प्रारंभ हा़े गई है। 10 दिन के माैसमीय उलटफेर के बाद अब आसमां साफ हो चला है। इसलिए ग्रीन पीजन यानी हरियल की भी गतिविधि बढ़ गई हैं। जाेड़ा बनाने के लिए जुटने लगे है। क्योंकि मार्च से इनका प्रजनन काल प्रारंभ हो जाता है।

इसलिए इन्हें समूह में जाेड़ाें की तलाश करते देखा जा सकता है। रविवार काे एक पेड़ पर 46 से ज्यादा हरियल देखे गए। जाे अपनी भाषा में बतिया रहे थे। यानी इस सीजन के लिए हमसफर काे तलाश रहे थे। ब्रीडिंग पीरियड में मादा काे रिझाने के लिए सुरीली आवाज निकालता है। जाेड़ा बनाने का काम अप्रैल मध्य तक चलेगा। सामान्यत: तीन अंडे देता है और मई में अंडों से बच्चे बाहर आ जाएंगे। अंडों और बच्चों को बड़ा करने में दोनों मिलकर काम करते हैं।

शर्मिली प्रवृत्ति... इसलिए घने जंगल में दिखता है
वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर डीडी शर्मा ने बताया कि पीले पंजे वाला हरा कबूतर बहुत सुंदर शर्मिला और गहरे जंगल में रहने का शाैकीन हाेता है। हरियल जंगली फलों, बेर और गूलर आदि पर निर्भर रहता है। ज्यादातर झुंड में रहना पसंद करता है। लंबाई 31 से 35 सेंटी मीटर Qर वजन करीब 250 ग्राम हाेता है। यह एक हजार मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। वनों के लगातार कटनी से इसके अस्तित्व पर संकट छाया रहता है। यह भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण पूर्व एशिया में पाया जाता है।