भरतपुर की शान: एक साल में देश को दीं 4 पेट्रोलियम ट्रेन, अब बॉर्डर पर डिफेंस शेल्टर भी तैनात होंगे

भरतपुर की शान: एक साल में देश को दीं 4 पेट्रोलियम ट्रेन, अब बॉर्डर पर डिफेंस शेल्टर भी तैनात होंगे

मालगाड़ी के वैगन्स बनाने के लिए प्रसिद्ध सिमको यानी टीटागढ़ अब डिफेंस और मेट्रो के क्षेत्र में भी उतर गई है। भरतपुर में डिफेंस शेल्टर यानी मोबाइल बंकर बन रहे हैं। इनकी पहली खेप इसी महीने भेजी जाएगी। इसके लिए जबलपुर में तैयार विशेष तरह के 6 ट्रेटा ट्रक भी आ गए हैं। सुरक्षा के लिहाज से तैयार किए गए इन ट्रकों पर शेल्टर्स को सैट किया जाएगा। फिर इन शेल्टर होम को बार्डर पर तैनात किया जाएगा। जो दुश्मन से हमारे जवानों की सुरक्षा करने में काफी उपयोगी साबित होंगे।

कंपनी सुरक्षा कारणों से शेल्टर की डिजाइन, साइज, मोटाई और अन्य जानकारी तो नहीं बता रही। लेकिन, इतना जरूर है कि ये मेटेलिक से निर्मित और काफी मजबूत है। एक शेल्टर्स की कीमत करीब एक करोड़ रुपए है। कंपनी का दावा है कि इन शेल्टर्स पर न तो बम और बंदूक की गोली असर करेगी और न ही किसी तरह का रेडिएशन। पहला आर्डर करीब 80 शेल्टर्स का मिला है। इसके अलावा टीटागढ़ की ओर से अग्नि-5 सहित कई मिसाइलों के कैनिस्टर भी बनाए जा रहे हैं।

ये लांचिंग में काम आते हैं। जल्द ही डिफेंस ब्रिज बनाना भी पाइपलाइन में है। साथ ही कन्टेनर वैगन बनाने का भी काम प्रस्तावित है। पहले कभी सिमको के नाम से प्रसिद्ध भरतपुर की यह कंपनी अब टीटागढ़ वैगन्स लिमिटेड के नाम से जानी जाती है। इसकी कोलकाता इकाई को मैट्रो और नेवी के युद्धपोत बनाने का भी आर्डर मिला है। इसलिए संभावना है कि इसके कुछ पार्ट भरतपुर की फैक्ट्री में बनने शुरू हो जाएं। लब्बोलुआब यह है कि हमारी सिमको अब फिर से मार्केट में खड़ी हो रही है।

कंपनी के कार्यकारी निदेशक मामराज चौधरी ने बताया कि डिफेंस आइटम सहित लोको शेड, वैगन्स, हैवी मशीनरी से संबंधित कई प्रॉडक्ट भरतपुर में बनाए जा रहे हैं। सैन्य नियमों को ध्यान में रखते हुए फैक्ट्री एरिया को चारदीवारी और वायरिंग से कवर्ड किया जा रहा है। आने वाले समय में फैक्ट्री फिर बुलंदियों को छुएगी। क्योंकि हमें सभी जगह से आर्डर मिल रहे हैं। हाल ही में फैक्ट्री को 250 बीओवीएसएन वैगन्स का आर्डर मिला है। इससे भरतपुर में राजस्व और रोजगार की संभावनाएं बढेग़ी। अगले दो साल में करीब 500 लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल सकता है।

भरतपुर. टीटागढ़ फैक्ट्री में तैयार होते शेल्टर।

भरतपुर. टीटागढ़ फैक्ट्री में तैयार होते शेल्टर।

रिकॉल... सन‌् 1957 में लाल बहादुर शास्त्री जी ने किया था उद्घाटन

भरतपुर में सिमको वैगन्स फैक्ट्री का उद्घाटन 31 जनवरी,1957 को तत्कालीन रेलमंत्री लालबहादुर शास्त्री ने किया था। उस समय यह सेंट्रल इंडिया मशीनरी मेन्युफैक्चरिंग लि. ग्वालियर की वैगन डिवीजन थी। जो अब टीटागढ़ वैगन्स लि. के नाम से है। सिमको में बने वैगन्स भारत के साथ नेपाल, नाइजीरिया, श्रीलंका, बांग्लादेश, वियतनाम, कंबोडिया, इराक और युगांडा में भी सप्लाई होते थे। यहां ओपन, कवर्ड, बॉटम डिस्चार्ज, गार्ड, एलपीजी, टीवीएनएल, कन्टेनर, बीओबीएसएन वैगन बनते हैं। फैक्ट्री 188 एकड़ में फैली है।

उल्लेखनीय है कि लेवर प्राब्लम की वजह से 2000-08 तक फैक्ट्री बंद रही। लेकिन, 2010 में टीटागढ़ ने इसे अधिगृहीत कर लिया। सिमको में सालाना 2800 वैगन बनते थे। पिछले साल टीटागढ़ में 1200 वैगन्स बनाए थे। सिमको में 2900 कर्मचारी स्थाई और करीब 3 हजार कर्मचारी अस्थाई थे। सिमको पर विशेष अध्ययन कर चुके डाॅ.अशोक गुप्ता ने पेपर में लिखा था कि 80-90 के दशक में सिमको का करीब 3 करोड़ रुपए भरतपुर शहर में रन करता था। यानी सिमको भरतपुर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ थी। अब टीटागढ़ में करीब 350 लोग काम करते हैं।

एक साल में बनाए इलेक्ट्रिक इंजन के 72 कवर

टीटागढ़ 7 साल से रेल इंजन के कवर यानी लोकोशेड भी बना रही है। पिछले साल भी 72 लोकोशेड बनाए गए। इस साल टीटागढ़ के पास 122 लोकोशेड के आर्डर हैं। यहां 19.5 मीटर लंबे और करीब 50 टन वजनी गुड्स ट्रेन के इंजन स्ट्रक्चर बनाए जा रहे हैं। एक महीने में करीब 6 लोको शैड तैयार होते हैं। इन्हें चितरंजन लोको मोटिव वर्क्स और डीएलडब्ल्यू बनारस भेजा जाता है। वहां इनमें पावर यूनिट लगाई जाती है। सिमको के स्ट्रक्चर क्वालिटी काफी अच्छी है। एक शेड की कीमत करीब 1.33 करोड़ रुपए है। इसके अलावा टीटागढ़ के नाम से ट्रैक्टर, क्राउलर क्रेन, हायवा आदि भी बनाए जाते हैं। यहां बने ट्रैक्टर 35, 45 और 55 एचपी के हैं। इनके आगे वाला हिस्सा चढ़ाई पर उठता नहीं है। चार पेट्रोलियम वैगन ट्रेन भारत पेट्रोलियम कंपनी के लिए बनाई गई हैं। प्रत्येक ट्रेन में 32 वैगन हैं। एक वैगन की कीमत करीब 90 लाख रुपए है।

दो महीने बाद शिप कंटेनर भी बनने लगेंगे

2 महीने मेें शिप के कंटेनर भी बनने लगेंगे भरतपुर यूनिट में। इसके लिए प्रबंधन ने मंजूरी दे दी है। 1000 कंटेनर प्रतिमाह होगी इस यूनिट में इन्हें बनाने की क्षमता। कार्यकारी निदेशक मामराज सिंह ने बताया जो कंटेनर बनाए जाएंगे वह पानी के जहाज पर आयात-निर्यात का सामान ढोने के लिए बनेंगे। इसके अलावा डोमेस्टिक कंटेनर बनाए जाएंगे। एक की क्षमता 27 टन होगी।

भरतपुर में बनते हैं मिसाइल के प्रक्षेपास्त्र और कवर

टीटागढ़ में मिसाइल के प्रक्षेपास्त्र और कवर भी भरतपुर में बनाए जाते हैं। प्रक्षेपास्त्र मिसाइल की लांचिंग और केनोपी ट्रांसपोर्टेशन के काम आता है। कैनिस्टर की लंबाई 20 मीटर और चौड़ाई 3 मीटर है। मिसाइल को सुरक्षित और सही दिशा में लांच करने में केनिस्टर की मुख्य भूमिका रहती है। उल्लेखनीय है कि अग्नि-5 मिसाइल का आखिरी सफल परीक्षण 31 मार्च, 2015 को हुआ था। जिसकी मार एशिया के सभी देश और आधे यूरोप तक है।