स्माइल प्रोग्राम काे बच्चों का अनहैप्पी ढाई लाख में से 50 हजार जुड़े, अब सिर्फ 460 बच्चे प्रोजेक्ट स्माइल का भरतपुर जिले में खराब प्रदर्शन

स्माइल प्रोग्राम काे बच्चों का अनहैप्पी ढाई लाख में से 50 हजार जुड़े, अब सिर्फ 460 बच्चे प्रोजेक्ट स्माइल का भरतपुर जिले में खराब प्रदर्शन

कोरोना काल में बच्चों को ऑनलाइन प्लेटफार्म से जोड़ते हुए स्माइल प्रोजेक्ट के माध्यम से पढ़ाई कराने के सरकार के प्रयासों को करारा झटका लगा है। बच्चों ने स्माइल प्रोग्राम काे अनहैप्पी कह दिया है। इसलिए शुरू में जिले के 2 लाख 59 हजार 726 छात्रों में से 51 हजार 808 विद्यार्थी ऑनलाइन स्टडी से जुड़े थे। ताजा रिपाेर्ट में बच्चों की संख्या सिमटकर 460 ही रह गई है।

इस तरह खराब प्रदर्शन के कारण भरतपुर प्रदेश में 32 वें पायदान पर आ गया है। क्‍योंकि जहां सिर्फ 0.89 प्रतिशत ही विद्यार्थियों की ऑनलाइन भागीदारी है। प्रदेश में सबसे ज्यादा 14.47 प्रतिशत भागीदारी गंगानगर के स्टूडेंट की है और दूसरे नंबर पर जयपुर की 10.93 प्रतिशत तथा तीसरे नंबर पर बारां जिले की 8.47 प्रतिशत दर्ज की है, जबकि सबसे फिसड्डी 33वें स्थान पर चूरू जिले की 0.69 प्रतिशत है।

समसा के सहायक परियोजना समन्वयक राजेश कुमार जैन ने बताया कि सभी ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों से जवाब मांगा गया है कि किन-किन पीईईओ ने इस कार्यक्रम के प्रति उदासीनता बरती है और किन-किन शिक्षकों ने 5-5 बच्चों को कॉलिंग नहीं की है। रिपोर्ट सोमवार तक आने की उम्मीद है। उसके बाद दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। साथ ही इस कार्यक्रम को गंभीरता से लेते हुए अधिक से अधिक भागीदारी का प्रयास किया जाएगा।

12वीं तक के लिए है विशेष व्यवस्था
प्रोग्राम स्माइल में शिक्षा विभाग ने कक्षा एक से 12वीं तक के लिए वीडियो सामग्री की भी विशेष व्यवस्था की है। शिक्षा विभाग ने प्रत्येक विषय के लिए 30-40 मिनट की सामग्री के वीडियो तैयार किए गए हैं। ये वीडियो ग्रेड एक-दो, 3 से 5, 6 से 8 और 9 से 12 वीं कक्षा स्तर के तैयार किए गए हैं। इस सामग्री की समीक्षा राजस्थान स्टेट काउन्सिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एण्ड ट्रेनिंग उदयपुर के विषय विशेषज्ञों ने तैयार की है।

विद्यार्थी ई-कटेंट के माध्यम से घर बैठकर ही इस प्रोजेक्ट के जरिए नया पाठ्यक्रम पढ़ रहे हैं और अपनी शैक्षणिक और बौद्धिक क्षमताओं को बढ़ा रहे हैं। साथ ही इस प्रोजेक्ट के जरिये अभिभावकों से भी निरंतर सम्पर्क में रहते हुए फीडबैक लिया जा रहा है। जिसके लिए प्रत्येक शिक्षक को कम से कम 5 बच्चों को हर दिन कॉलिंग करना आवश्यक है। जिसके माध्यम से भी ई-कंटेंट के बारे में बताया जाता है और पढ़ाई के लिए प्रेरित करना होता है।

हालात, डीग, नदबई व पहाड़ी के पीईईओ का फॉरवर्डिंग प्रतिशत शून्य

स्माइल कार्यक्रम में व्हाट्सएप के माध्यम से छात्रों और शिक्षकों के लिए रोजाना वीडियो सामग्री प्रतिदिन सुबह 9 बजे भेजी जाती है। जिसे बाद में छात्रों को फॉरवर्ड किया जाता है। इसमें सबसे ज्यादा खराब प्रदर्शन पंचायत स्तर के पीईईओ का रहा है जिन्होंने संबंधित विद्यालयों के संस्था प्रधान, शिक्षक व विद्यार्थियों तक के लिए मैसेज फॉरवर्ड तक नहीं किए हैं।

डीग, नदबई व पहाड़ी के पीईईओ का फौरवर्डिंग प्रतिशत शून्य है। वह प्रदेश से भेजे जाने वाले मैसेज को आगे फॉरवर्ड ही नहीं कर रहे हैं, तो बच्चे पढ़ाई कैसे कर पाएंगे। इसके अलावा शिक्षक को भी कम से कम 5 बच्चों से हर रोज कॉलिंग करना होता है, जो नहीं कर रहे हैं।

इसमें सबसे बड़ी परेशानी एंड्राइड मोबाइल फोन बच्चों के पास नहीं होना भी है, क्योंकि जो बच्चे लॉकडाउन के दौरान अपने अभिभावकों के फोन का उपयोग कर रहे थे, वह फोन अब लॉकडाउन खत्म होते ही अभिभावकों ने वापस ले लिए हैं। अभिभावक अब अपने काम धंधे पर फोन को ले जाते हैं और बच्चे घर पर बिना फोन के रहते हैं।

अब बंद स्कूलों के बच्चों काे ऑनलाइन पढ़ाई
विद्यार्थियों और शिक्षकों को ऑनलाइन पठन-पाठन से जोड़े जाने के लिए 13 अप्रेल से प्रोजेक्ट सोशल मीडिया इंटरफेस फॉर लर्निंग एंगेजमेंट (स्माइल - SMILE ) की शुरुआत की है। राज्य के विद्यार्थियों और शिक्षकों के व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर उन्हें पढ़ने-पढ़ाने की तैयार सामग्री भेजी जाने की पहल की गई है।

जिसमें विद्यार्थियों-शिक्षकों को घर बैठे सोशल मीडिया के जरिए पढ़ाई करवाने की यह अनूठी पहल की गई। प्रोजेक्ट ‘स्माइल’ के तहत विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए सीखने-सिखाने की निरंतरता के लिए अभिभावकों और शिक्षकों के साथ पीईईओ द्वारा व्हाट्सएप ग्रुप्स बनाए गए हैं। इन ग्रुप पर प्रतिदिन कक्षाओं के पाठ्यक्रम के आधार पर वीडियो बनाकर लिंक भेजे जा रहे हैं, जिसे देखकर बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।

किस ब्लॉक के कितने प्रतिशत पीईईओ कर रहे हैं मैसेज फॉरवर्ड
ब्लॉक - प्रतिशत

सेवर - 14.29
नगर - 12.82
कामां - 10.00
रूपवास - 04.44
बयाना - 04.35
वैर - 04.17
कुम्हेर - 02.70
डीग - 00.00
नदबई - 00.00
पहाड़ी - 00.00
स्रोत : शिक्षा विभाग