कोरोना से ज्यादा दर्दनाक लापरवाह ड्राइविंग
वाहन चलाते समय यातायात नियमों का पालन कीजिए, क्योंकि लापरवाह ड्राइविंग से हादसे बढ़ रहे हैं। पिछले सात महीने में कोरोना के मुकाबले सड़क दुर्घटनाओं में 106 फीसदी ज्यादा जानें गई हैं। मार्च से सितंबर तक कोरोना काल में संक्रमण के कारण 82 लोगों की मौत हुई हैं, जबकि सड़क हादसों से 167 लोगों काे जान गंवानी पड़ी।
अनलॉक होते ही लोगों का मूवमेंट बढ़ गया है। यद्यपि अभी भी ट्रेफिक रूटीन से कम है, लेकिन रफ ड्राइविंग हादसों को जन्म दे रही है। पिछले सात महीने के कोरोना काल में 321 दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें 167 लोगों की मौत और 210 घायल हुए हैं। यह आंकड़े चिंताजनक हैं।
क्योंकि ये तो महज सरकारी आंकड़े हैं। मरने वालों और हादसों की संख्या और भी अधिक है, क्योंकि दुर्घटना के वक्त घायल होने वालों में से औसतन 20 फीसदी लोग महीनों उपचार के बाद भी दम तोड़ देते हैं। बहुत से मामलों में लोग पुलिस तक नहीं जाते और समझौता कर लेते हैं।
जानकारों का अनुमान है कि जिले में रोजाना दो से तीन दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें एक व्यक्ति काे रोजाना जान गंवानी पड़ रही है और एक से दो व्यक्ति रोजाना घायल हो रहे हैं। ये आंकड़े देखने में कम लग रहे हैं, लेकिन भयानक एवं दर्दनाक हैं। इसलिए सड़क दुर्घटनाओं को रोकने की जिम्मेदारी सरकार या पुलिस की ही नहीं, अपितु हम सब की है। क्योंकि 60 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएं चालक की लापरवाही की वजह से ही होती हैं। बाकी अन्य सड़क दुर्घटनाएं खराब सड़क या अन्य किसी विशेष वजह से होती है।
एक्सपर्ट व्यू: ट्रैफिक सेंस की कमी और लापरवाही से हो रहे हादसे : श्रीनाथ शर्मा
ट्रैफिक व्यवस्था के लिए न्यायालय में लड़ाई लड़ रहे अधिवक्ता श्रीनाथ शर्मा का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं का कारण आमजन में जागरुकता की कमी एवं लापरवाही की अधिकता है। अधिकांश लोगों में ट्रैफिक सेंस का बेहद अभाव है। शराब पीकर वाहन चलाना, मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाना, तेज स्पीड में वाहन चलाना हैं, जो दुर्घटनाओं के अंजाम देते हैं।


