नगौर में 90 पीपीएम के स्तर तक पहुंची पानी में फ्लोराइड की मात्रा
प्रदेश में राजधानी जयपुर समेत सभी 33 जिलों में पानी में फ्लोराइड की मात्रा तय मानक से काफी ज्यादा है। इससे लोगों में हड्डियों व दांतों में कमजोरी तथा जोड़ों व घुटनों के दर्द की समस्याएं बढ़ रही हैं। नागौर जिले में तो पीने के पानी में फ्लोराइड की मात्रा 90 पीपीएम (पार्ट पर मिलियन ) के खतरनाक स्तर तक पाई गई है।
इस दृष्टि से दूसरा स्थान चूरू, तीसरा चूरू तथा चौथा स्थान जयपुर जिले का आता है। जयपुर स्थित निम्स विश्वविद्यालय एवं इंडियन मेडिकल ट्रस्ट की ओर से स्थापित नेशनल रेफरल सेंटर फॉर फ्लोराइड पिओसेनिंग इन इंडिया की ओर से हाल ही किए गए एक रिसर्च में यह खुलासा हुआ है। पीने के पानी में तय मानक से ज्यादा फ्लोराइड स्वास्थ्य के लिए धीमे जहर का काम करता है।
यह हड्डियों का कमजोर होना, दांत पीले होना, दांत गिरना, जोड़ों-घुटनों व कमर में दर्द रहना, चलते समय कमर का झुकना, कब्ज, भूख ज्यादा लगना, पेशाब ज्यादा आना, पेट दर्द, उल्टी-दस्त जैसी अनेक बीमारियों का कारण बनता है। नागौर में पानी में फ्लोराइड की मात्रा 90 पीपीएम, चूरू में 32 पीपीएम, श्रीगंगानगर में 28.2 पीपीएम और जयपुर में 28.1 पीपीएम के खतरनाक स्तर पर मिली है। इतने ज्यादा फ्लोराइड स्तर वाला पानी पीने के योग्य नहीं होता है।
जानकारी के अनुसार देश के 270 जिलों में लगभग 6.60 करोड़ लोग फ्लोरोसिस से प्रभावित हैं। राजस्थान, गुजरात और आंध्रप्रदेश में इसका प्रभाव सबसे ज्यादा है। देश में करीबन 65 लाख बच्चे फ्लोरोसिस से पीड़ित हैं। इस समस्या से निबटने के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास भी हो रहे हैं।
राजस्थान में पानी में फ्लोराइड की अधिकता की समस्या से निबटने के लिए जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जीका), राज्य जल व स्वच्छता मिशन और राज्य का पीएचईडी विभाग संयुक्त रूप से प्रयास में लगे हुए हैं। इसके लिए राज्य में नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रिवेंशन एंड कंट्रोल फ्लोरोसिस प्रोग्राम (एनपीपीसीएफ) भी संचालित किया जा रहा है।
एसएमएस अस्पताल के आर्थोपेडिक्स विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. डी.एस. मीणा के अनुसार पीने के पानी में तय मानक से ज्यादा फ्लोराइड होने से फ्लोरोसिस जैसी बीमारियां बढ़ती हैं। राजस्थान स्टेट डेंटल काउंसिल के रजिस्ट्रार व आरयूएचएस कॉलेज ऑफ डेंटल साइंसेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. डी.के. गुप्ता का कहना है कि पीने के पानी में एक पीपीएम से ज्यादा फ्लोराइड होने पर दांतों में पीलापन, छेद, भूरे धब्बे और दांत टूटने जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
जयपुर के चांदपोल स्थित जनाना अस्पताल की अधीक्षक डॉ. पुष्पा नागर का कहना है कि गर्भस्थ शिशु की मां का अधिक फ्लोराइड युक्त जल का सेवन करना गर्भस्थ शिशु के लिए खतरनाक हो सकता है।


