डिप्टी एसपी के मकान पर किराएदार ने किया कब्जा थाने में सुनवाई नहीं हुई तो पहुंचे कमिश्नर के पास
पुलिस महकमे के एक डिप्टी एसपी के मकान पर किराएदार ने कब्जा कर लिया। जब बातचीत से बात नहीं बनी तो वे बासनी थाने रिपोर्ट लिखवाने पहुंचे, लेकिन वहां पर सुनवाई नहीं हुई, बस जांच का आश्वासन दिया गया। इससे परेशान हो वे पुलिस कमिश्नर के पास पहुंचे, तब जाकर उनकी रिपोर्ट दर्ज हुई।
जिले के बालेसर में डिप्टी एसपी की पोस्ट पर लगे राजूराम का मकान बासनी थाना इलाके के सरस्वती नगर में है, जहां खुद को दंपती बताने वालों ने घर के एक परिसर पर कब्जा कर लिया है। अब मामले की जांच कुड़ी थानाधिकारी कर रही हैं।
जांच शुरू, कब्जा बरकरार
कुड़ी थानाधिकारी मुक्ता पारीक मामले की जांच कर रही हैं। पारीक ने बताया कि वे सोमवार को सरस्वती नगर स्थित डिप्टी एसपी के मकान का मौका व हालात देखने पहुंचीं, जहां किराएदार रह रहे थे। तीन मंजिला मकान के ऊपरी हिस्से में कोई और किराएदार रह रहे हैं। नीचे के हिस्से में एक दंपती रह रहे थे। मामले की जांच की जा रही है।
लोन लेकर पत्नी के नाम बनाया मकान
डिप्टी एसपी राजूराम ने एसबीआई से लोन लेकर पत्नी पुष्पा चौधरी के नाम सरस्वती नगर में एक मकान बनाया। इस मकान का एक परिसर मनोज भंडारी व उनकी पत्नी सन्नू मेवाड़ा (जिन्होंने खुद को पति-पत्नी बताया) को किराए पर दे दिया। 16 अगस्त को दिन में वे मकान खाली कर सामान लेकर चले गए थे। मकान का निचला हिस्सा जहां उन्हें किराए दे रखा था वह सुपुर्द कर चले गए।
मकान खाली करते समय पड़ोसी भी वहां मौजूद थे। इसके बाद डिप्टी एसपी की पत्नी ने ताला लगाया और बेटी के साथ विवेकानंद नगर पाल रोड चले गए थे। इससे पहले भी उनके खिलाफ घर में तोड़फोड़ व सामान चोरी करने का मुकदमा बासनी थाने में करवाया था।
खुद को बता रहे दंपती, एक साल पहले करवाया था दुष्कर्म का केस
मामले में सामने आया कि प्रतापनगर निवासी मनोज भंडारी व सन्नू मेवाड़ा अब खुद को दंपती बता रहे हैं। जबकि एक साल पहले प्रतापनगर थाने में मनोज के खिलाफ ही महिला ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का केस दर्ज करवाया था। जब डिप्टी एसपी के मकान को किराए पर लेने के लिए पहुंचे तो उन्होंने खुद को दंपती बताया था।
19 को मकान का ताला तोड़ किया कब्जा
रिपोर्ट में बताया कि 16 अगस्त को मकान खाली कर किराएदार चले गए थे, लेकिन वापस वे 19 अगस्त को आए और उसी परिसर पर लगे ताले को तोड़कर कब्जा कर लिया। बासनी थाने पहुंचे रिपोर्ट दी, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं किया। इस पर 28 अगस्त को पुलिस कमिश्नर के यहां पहुंचे, जहां से डीसीपी पश्चिम कार्यालय गए तो केस दर्ज हुआ।


