यूक्रेन में वागड़ के 200 छात्र फंसे:यूक्रेन में रात 11 बजे अलर्ट का सायरन बजा और बांसवाड़ा के मेडिकल छात्रों काे ले गए शेल्टर होम
अचानक मिसाइल, फायरिंग व रॉकेट की गूंज, सड़कों पर सन्नाटा, केवल धमाकों की आवाजें, आसमान में उठता विनाशकारी धुआं, हर जगह सायरन की आवाज, हर चेहरे पर भय, घरों में दुबके और सहमे हुए लोग। रूस के हमले से ऐसा ही दर्दनाक और भयावह दृश्य नजर आ रहा हैं यूक्रेन में। गुरुवार रात 11 बजे सोए और डेढ़ किमी दूर सिटी सेंटर से सायरन बजा, लेकिन सुनाई नहीं दिया तो दोस्तों ने फोन कर बताया कि हाई अलर्ट जारी किया है। जल्दी से समीपस्थ शेल्टर हाउस (हर आधे किमी परिधि में बना भूमिगत, जहां सभी इमरजेंसी सुविधाएं उपलब्ध) में पहुंचे। फिर डॉक्यूमेंट और पानी बैग में रखकर निकल गए। हमें यूक्रेनी भाषा नहीं आती थी फिर भी मदद की। करीब 3 बजे दूसरा अलार्म बजा मतलब स्थितियां ठीक हैं।
फिर वापिस कमरों की ओर लौटे। अभी भी रेड अलर्ट पर तो हैं। रूस सभी मिलिट्री बेस तबाह करने की कोशिश कर रहा हैं। टर्नोपिल एरिया में एक मिलिट्री बेस व मिलिट्री एयरपोर्ट है, जिस पर बमबारी करने का टारगेट है। जिससे जिस एरिया में हम रह रहे हैं, वहां हमारी रिस्क बढ़ गई है। टर्नोपिल एरिया के लोकल एडमिनिस्ट्रेशन ने हाई अलर्ट माॅड कर दिया है। रात में ये जो भी घटित हो रहा था, वो हमारे जीवन में पहली बार हुआ है। चिंता के साथ डर था, सबकी मुस्कान गायब थीं। अभी जमीनी हमले के बजाय हवाई हमले हो रहे हैं।
इसलिए कीव की ओर ज्यादा हैं। सिटी सेंटर से डेढ़ किमी अंदर हमारा रेसिडेंस हैं। हमारी काॅलोनी के सभी प्रवेश द्वार बंद हैं। यूक्रेन सरकार व प्रशासन ने रात को भी प्रेस काॅफ्रेंस, टीवी आदि के जरिए लोगों को सचेत किया। क्या स्थितियां बन सकती हैं और आपको कैसे तैयार रहना है।
प्रशासन बेहतर तरीके से सहयोग कर रहा है। बात इंडियन एंबेसी की करें तो एक्टिव फाॅर्म में कार्य कर रही है। पौलेंड बॉर्डर से भारतीयों को निकालने का प्रयास किया जा रहा है। अभी तक करीबन 500 बच्चों को निकाला जा चुका है। यूक्रेन में अलग-अलग राज्यों में 18 हजार भारतीय फंसे हैं। एक साथ बॉर्डर से निकालना इतना आसान नहीं है। सभी भारतीय बच्चों से रजिस्ट्रेशन करवा लिए हैं, ताकि दिक्कत न हो।
satveer 

