एयरपोर्ट अथॉरिटी के लिए निजीकरण घाटे का सौदा, हर माह 8 से 10 करोड़ रुपए का नुकसान

एयरपोर्ट अथॉरिटी के लिए निजीकरण घाटे का सौदा, हर माह 8 से 10 करोड़ रुपए का नुकसान

जयपुर: एयरपोर्ट के निजीकरण को मंजूरी दी जा चुकी है। अडानी ग्रुप ने भले ही छह अन्य कंपनियों की तुलना में सबसे ज्यादा रेट लगाई हो, इसके बावजूद एयरपोर्ट अथॉरिटी को नुकसान तय है। निजीकरण में की गई जल्दबाजी से एयरपोर्ट अथॉरिटी को हर माह 8 से 10 करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है।

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8 नवंबर 2018 को केन्द्र की कैबिनेट कमेटी ने 6 एयरपोर्ट को निजी हाथों में देने को मंजूरी दी थी। जयपुर, अहमदाबाद, लखनऊ, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम और मंगलूरु एयरपोर्ट 50 साल के लिए पीपीपी मोड पर संचालित करने का फैसला लिया गया। पीपीपी मोड पर देने के लिए बनी कमेटी और नीति आयोग ने सिफारिशें दी थीं।

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जल्दबाजी इस बात से समझी जा सकती है कि 7 दिसंबर को नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने निजीकरण का ड्राफ्ट एग्रीमेंट तैयार किया था। 10 दिसंबर को यानी 3 दिन में नीति आयोग ने अप्रेजल नोट भेज दिया। इसी दिन इकोनॉमिक अफेयर्स डिपार्टमेंट ने अप्रेजल नोट भेज दिया। 11 दिसंबर को पीपीपीएसी ने मीटिंग बुलाई और 14 दिसंबर को एयरपोर्ट के निजीकरण का रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल आमंत्रित किया।

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2 माह में निजीकरण के लिए जरूरी काम पूरे कर लिए गए। 16 फरवरी 2019 को तकनीकी निविदा खोले जाने के बाद 25 फरवरी को वित्तीय निविदा खोली गई। इसमें अडानी ग्रुप को एयरपोर्ट देने का फैसला हुआ। यह खुलासा एयरपोर्ट अथॉरिटी के कालीकट एयरपोर्ट के एम्प्लॉइज यूनियन द्वारा तैयार एक स्टडी रिपोर्ट में हुआ है।