धौलपुर के जंगल से बाघिन बादली ने दो शावकों को दिया जन्म, कैलादेवी अभयारण्य से भटककर आई थी

धौलपुर के जंगल से बाघिन बादली ने दो शावकों को दिया जन्म, कैलादेवी अभयारण्य से भटककर आई थी
दो शावकों के साथ कैमरे में कैद हुई बाघिन बादली।

धौलपुर के सरमथुरा जंगलों में बाघिन बादली (टी-117) दो शावकों के साथ नजर आई है। जिला वन अधिकारी केसी मीना ने बताया कि सरमथुरा के झिरी में लगे कैमरे में बादली के साथ दो शावक दिखे हैं। बादली, बाघ (टी- 116) के साथ धौलपुर में एक साल से मेटिंग कर रही थी। दो शावकों के आने से धौलपुर को टाइगर रिजर्व कॉरिडोर बनाने पर बल मिल सकता है।

रणथंभौर और कैलादेवी अभयारण्य से सटे धौलपुर के बीच यूं तो बाघों के आने-जाने का सिलसिला बना रहता है। रणथंभौर अभयारण्य में बाघों की बढ़ती तादाद से इन बाघों को धौलपुर और कैलादेवी की वादियां रास आ रही हैं। पहले भी टाइगर रणथंभाैर से निकलकर धाैलपुर की सीमा तक आए हैं। लेकिन ऐसा पहला माैका है कि अब इन्होंने यहां डेरा डाला हुआ है।

कैलादेवी अभयारण्य में 10 माह पहले मां सुंदरी (टी- 92) से बिछड़ने के बाद साढ़े तीन साल की बादली (टी-117) धौलपुर के जंगलों में आ गई थी। यहां वो लगातार बाघ (टी-116) के साथ दिख रही थी।

10 माह से सरमथुरा के जंगलों में दिख रही थी बाघिन।
10 माह से सरमथुरा के जंगलों में दिख रही थी बाघिन।

बादली की गतिविधियों के लिए लगाए 10 कैमरे
बाघिन बादली, यंग टाइगर (टी-116) के साथ धौलपुर के जंगलों में काफी समय से नजर आ रही थी। DFO केसी मीणा कहते हैं कि बादली की एक्टिविटी की निगरानी के लिए करीब 10 ट्रैप कैमरे धौलपुर के सरमथुरा रेंज के जंगलों में लगाए गए हैं।