बयाना सीएचसी में 7.90 लाख का गबन; कैशियर 5.26 लाख जमा कराए
कस्बे के सरकारी अस्पताल में कार्यरत वरिष्ठ सहायक एवं तत्कालीन कैशियर द्वारा 7.90 लाख की सरकारी राशि के गबन का मामला सामने आया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा निदेशालय की ओर से कराई गई आंतरिक ऑडिट में ने यह घोटाला पकड़ में आया। इतने बड़े घोटाले की भनक तत्कालीन सीएचसी इंचार्ज को भी नहीं लग पाई।
गबन का मामला वर्ष 2018 का है। दिलचस्प ये है कि घोटाला पकड़ में आने के बाद कैशियर ने 5.26 लाख की राशि सरकारी कोष में जमा भी करा दी। लेकिन दंड के रुप में लगाई गई ब्याज की राशि 2.64 लाख बार-बार नोटिस के बाद भी जमा नहीं कराई। इसके बाद अब मंगलवार शाम को उच्चाधिकारी के निर्देश पर सीएचसी इंचार्ज डॉ. जोगेंद्र सिंह ने वरिष्ठ सहायक राहुल के खिलाफ थाने में गबन का केस दर्ज कराया। मामला खुलने के बाद सीएचसी इंचार्ज ने वरिष्ठ सहायक से फिलहाल सभी चार्ज वापस ले लिए हैं।
सीएचसी इंचार्ज डॉ. जोगेंद्र सिंह ने बताया कि कार्यालय के वरिष्ठ सहायक राहुल राजौरा के पास पूर्व में कैशियर का चार्ज था। कुछ माह पहले चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय की ओर से कार्यालय की इंटरनल ऑडिट कराई गई थी। जिसमें ऑडिट टीम ने कार्यालय के अप्रैल 2018 से लेकर मार्च 2021 तक के अकाउंटस की जांच की थी। जांच प्रतिवेदन में ऑडिट टीम ने आक्षेप लगाए थे।
ऑडिट में सामने आया कि कैशियर राहुल ने मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी को मिली 5 लाख 26 हजार 70 रुपए की नकद राशि को एमआरएस के बैंक खाते में जमा नहीं कराया और कैशबुक में बैंक में राशि जमा कराने की एंट्री कर ली। सीएचसी इंचार्ज ने बताया कि ऑडिट में गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद 27 जुलाई 2021 को कैशियर ने गबन की गई राशि 5.26 लाख संस्था के बैंक खाते में जमा भी करा दी। लेकिन ऑडिट टीम द्वारा निकाली गई दंडनीय ब्याज की राशि 2 लाख 64 हजार 876 रुपए जमा नहीं कराए। इस पर कैशियर को चार बार नोटिस भी दिए गए। लेकिन उसने राशि जमा नहीं कराई।


