सीआरपीसी धारा 173 (8) यह सुरक्षा कवच सिर्फ खास लोगों के लिए है
कानून के लंबे हाथ आम अपराधियों की गर्दन के लिए भले ही फंदा साबित होते हों मगर प्रभावशाली ओहदेदार लोगों के लिए इसी कानून के हाथ रक्षा कवच बन गए हैं। सीआरपीसी की धारा 173 (8) की बदौलत पुलिस व अन्य जांच एजेंसियों ने पिछले सालों के दौरान बीसियों ऐसे रसूखदार लाेगाें व अफसराें को सीधा फायदा पहुंचाया है, जो भ्रष्टाचार सहित अन्य आपराधिक मामलाें में नामजद हाे चुके हैं। एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच अधिकारी तय समयावधि में धारा 173 (2) के तहत अंतिम नतीजा या चार्जशीट पेश करते हैं।
अगर किसी आरोपी के संबंध में जांच अधिकारी को अतिरिक्त जांच करनी है तो उसे धारा 173 (8) के तहत पेंडिंग किया जाता है और बाद में सप्लीमेंट्री चार्जशीट पेश की जाती है। धारा 173(8) के प्रावधान काे जांच अधिकारी अपनी सुविधा से आरोपियों काे फायदा पहुंचाने या उनकी जांच लटकाए रखने के लिए कर रहे हैं। ऐसे अनेक उदाहरणों में से एक किशनगढ़ की काेर्ट में लंबित प्रकरण में सहायक आबकारी अधिकारी के विरुद्ध पिछले 12 साल से जांच लंबित है और इस बीच ये प्रमोट होकर जिला आबकारी अधिकारी बन गए।
कई अन्य ऐसे ही मामलों में जहां कई आरोपी लिप्त हैं, वहां धारा 173 (8) का दुरुपयोग कर जांच अधिकारी ही जज बन गए हैं। कुछ आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ चार्जशीट पेश कर दी गई है, जबकि सबूत होते हुए भी कुछ के खिलाफ 173 (8) में जांच लंबित हैं। जांच अधिकारी ही यह तय कर रहे हैं कि किसके खिलाफ मुकदमा चलेगा और किसके खिलाफ ट्रायल लंबित रखनी है। अदालत में ऐसे मामलों की भरमार है।
आरोपी है तो जांच लंबित क्यों...
आठ साल पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने धारा 173 (8) को लेकर एक फैसले में कहा था कि जांच अधिकारी चार्जशीट लंबित रखते हैं और आरोपी मजे लेते हैं। जबकि ऐसे आरोपियों के खिलाफ धारा 299 के तहत चार्जशीट पेश कर उन्हें वारंट जारी करना चाहिए और गिरफ्तार नहीं होने पर फरार घोषित करें।
तीन साल से जेल अधीक्षक और चार जेलकर्मियों के खिलाफ सबूत ही ढूंढ रही है एसीबी
18 जुलाई 2019 को एसीबी ने अजमेर की सेंट्रल जेल में बंदियों तक नशे का सामान पहुंचाने व सुविधाएं देने, शारीरिक प्रताड़ना से बचाने की एवज में सुविधा शुल्क, जेल में आने वाले खाद्यान्न में हेराफेरी के गंभीर आरोपों में मुकदमा दर्ज कर 15 अक्टूबर 2019 को अदालत में दीपक उर्फ सन्नी सहित 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की थी। जबकि आरोपी जेल अधीक्षक नीलम चौधरी के अलावा चार जेल कर्मचारियों सहित 13 के खिलाफ धारा 173 (8) में जांच लंबित है।
12 साल से लंबित मामला, आरोपी सहायक आबकारी अधिकारी प्रकाश चंद प्रमोट होकर बन गए जिला आबकारी अधिकारी
किशनगढ़ आबकारी थाना ने 16 जून 2010 को एक ट्रक से 29,280 शराब के पव्वे बरामद किए। अवैध शराब जयपुर की एक डिस्टलरी से निकली थी। चालक हरिराम, मोहनलाल व मनोज के बाद शराब मंगवाने वाले कारोबारी जयसिंह और रतन सिंह को गिरफ्तार किया और 7 जून 2011 को चार्जशीट पेश कर दी। वहीं नकली परमिट व पास बनाकर शराब डिस्टलरी से निकलवाने के आरोपी सहायक आबकारी आयुक्त प्रकाश चंद सहित डिस्टलरी मालिक व अन्य के खिलाफ जांच लंबित रख दी, पांच के खिलाफ मुकदमा चल रहा है। जांच एजेंसी 12 साल से सबूत ही ढूंढ रही है।
बाबू को किया गिरफ्तार, आरएएस की जांच लंबित
किंग एडवर्ड मेमोरियल रेस्ट हाउस सोसायटी में वित्तीय अनियमितता का मामला एसीबी ने दर्ज किया था। 28 नवंबर 2021 को एसीबी ने प्रकरण में आरोपी बाबू सुदेश वर्मा को गिरफ्तार कर चार्जशीट पेश कर दी, वहीं सह आरोपी व सोसायटी के चेयरमैन आरएएस अधिकारी निशु अग्निहोत्री के खिलाफ 173 (8) में जांच लंबित रख दी। सुदेश वर्मा प्रकरण 2013 में दर्ज हुआ था।
रेवेन्यू बोर्ड रिश्वतखोरी कांड : शुरुआती गिरफ्तारी के बाद जांच ठप
रिश्वत के बल पर मनमाने फैसले करवाने के सनसनीखेज मामले में एसीबी ने राजस्व मामलों की सर्वोच्च अदालत रेवेन्यू बोर्ड के मेंबर सुनील शर्मा व बीएल मेहरड़ा सहित बिचौलिए वकील शशिकांत जोशी को पकड़ा तो यह संकेत मिले की एक बड़े रैकेट का खुलासा होगा, जिसमें सीनियर आईएएस भी शामिल हैं। 7 जून 2021 को एसीबी ने चार्जशीट पेश कर कई आरोपियों के खिलाफ 173(8) में जांच लंबित रख दी जो पूरी नहीं हो पाई है जबकि एक नामजद मेंबर तो रिटायर हो गए हैं। आईएएस मेंबरों के विवादित फैसलों को जांच में रखा लेकिन उन्हें छोड़ दिया।
आरपीएससी घूसकांड : आनन फानन में पेश हो गई क्लोजर रिपोर्ट
आरएएस के इंटरव्यू में अच्छ नंबर दिलाने की एवज में 23 लाख रुपए रिश्वत लेते हुए आरपीएससी के अकाउंटेंट सज्जन सिंह गुर्जर और नरेंद्र पोसवाल को एसीबी ने पकड़ा। नरेंद्र आरपीएससी की मेंबर राजकुमारी गुर्जर के पति सेवानिवृत्त आईपीएस भैरोंसिंह का नजदीकी था। एसीबी ने 2 सितंबर 21 को चार्जशीट पेश की जिसमें भैरोंसिंह सहित अन्य के विरूद्ध 173(8) में जांच लंबित रखी। 17 फरवरी को भैरों सिंह और उनकी पत्नी राजकुमारी गुर्जर को क्लीन चिट देते हुए क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर दी।


