तीन सेंचुरियों में सुरक्षा के नाम पर 3 पहरेदार साइकिल से करते हैं गश्त
अगर आप किसी शहर में देखेंगे ताे आपकाे एक या दाे सेंचुरियां मिल जाएंगी, लेकिन धाैलपुर की बात करें ताे यहां चार सेंचुरियां हैं, जहां इन जंगलाें की सुरक्षा के लिए एक सेंचुरी पर महज एक ही स्टाॅफ की तैनाती हाेने से जंगल की सुरक्षा में भी संशय बना हुआ है। इससे चाेरी छिपे शिकारी वन्यजीवाें का शिकार के साथ साथ जंगलाें में अवैध लकडी कटान भी सामान्य हाे गया है। भास्कर ने साेमवार काे तीनाें सेंचुरियाें का माैका मुआयना किया ताे सेंचुरियाें में जाे एक एक वनपाल या
वनरक्षक की तैनाती है, वे काेई भी नाका पर नजर नहीं आया। वहीं इनके नीचे लगे कैटल गाडर् भी गायब ही दिखे। नाका पर चैकपाेस्ट पर ताला लगा हुआ था। वहीं आसपास के गांवाें के लाेगों लाेगाें का जंगल में इस कदर आना जाना देखा गया कि मानाे काेई जंगल से सराेकार नहीं रखता हाे। जबकि ये वाइल्ड लाइफ सेंचुरियां हैं, जिसमें हर किसी का प्रवेश व राेकटाेक जरुरी हाेनी चाहिए। लेकिन भास्कर की गाडी काे किसी ने न राेका न टाेका।
पूरे जंगल की सेंचुरियाें में स्टाॅफ नदारद दिखाई दिया। इस पूरे वाक्या काे जब डीएफओ फुरकान अली खत्री काे बताया ताे उन्हाेंने स्टाफ की कमी की बात काे स्वीकार कर जंगल की सुरक्षा में स्टाॅफ की हर सेंचुरी में महज एक एक इंचार्ज की तैनाती काे बताया।
केसरबाग सेंचुरी, नाके पर नहीं मिला कर्मचारी
सहायक वनपाल गुडिया कुमारी से केसरबाग सेंचुरी में हाेने की जानकारी ली ताे उनका कहना था कि मैं सीएल लेकर छुट्टी पर हूं। इस पर उनसे पूछा कि हम नाका पर खडे हैं ताे यहां काेई स्टाफ नजर नहीं आ रहा है। ताे उन्हाेंने स्टाॅफ की कमी की बात बताई। वहीं कहा कि ऐसा हाेगा ताे वहां एक कैटल गार्ड हाेगा, उसे वहां अवकाश के बाद जिम्मा मिला हुआ है। लेकिन नाका में काेई नहीं मिला।
एसे में केसरबाग सेंचुरी और वन विहार सेंचुरी एक दूसरे से जुडी हुई हैं औरएरिया काफी ज्यादा हाे जाता है। एसे में स्टाॅफ की कमी व संसाधन का अभाव के चलते सेचुरियाें में विकास और सुरक्षा नहीं दिखी। क्याेंकि सेंचुरियाें के आसपास बसे गांवाें के लाेगाें का जंगल में खुले आम घूमना सामान्य बात है।
वन विहार सेंचुरी... एरिया 25.60 वर्ग किमी, सात क्यारी का रास्ता बदहाल मिला
साेमवार काे भास्कर के निरीक्षण में वन रक्षक हरविंदर अपनी पत्नी के पैरालाइसिस का अटैक के चलते अवकाश पर थे। उन्हाेंने बताया कि वहां तीन आदमी हैं, बेलदार, वृक्षपालक है। इनकी चपरासी की पाेस्ट हाेती है, वे जंगल में हाेंगे। मुझे वनपाल का चाजर् मिला हुआ है। वैसे मैं फाेरेस्ट गाडर् हूं। सेंंचुरी में क्या क्या काम हुए इस पर पूछा ताे बताया कि ग्रास लैंड काे उगाने का काम हुआ था।
ग्रास लैंड जूलीफ्लाेरा उन्मूलन और दीवार कायर् जाे अधूरा पडा है। बजट आएगा उस अनुसार काम हाेगा। वन विहार में सात क्यारी का रास्ता बदहाल हाेने पर पूछा ताे बताया कि बजट आते ही उसे दुरुस्त करा देंगे। उन्हाेंने पानी की प्राॅपर सुविधा की बात कही। बताया कि वन्यजीव गमिर्याें में तालाब सूखने से पानी के लिए परेशान हाेते हैं।
रामसागर सेंचुरी, एरिया 24.40 वर्ग किलाेमीटर: बिना हथियार के साइकिल से जंगल की गश्त
सहायक वनपाल राजेश कुमार मीणा का कहना था कि स्टाॅफ की कमी है। दाे फाेरेस्ट गाडर् हाेने चाहिए, एक फाेरेस्ट गाडर् हैं। इसमें रामसागर सेंचुरी की सुरक्षा कैसे हाे। संसाधन के लिए किसी भी सेंचुरी में बाइक नहीं है। जबकि बाइक मिलनी चाहिए। क्याेंकि मुल्जिम काे ले जाना, जंगल में काम पडने पर जाना, जंगल की गश्त इत्यादि काम हाेते हैं। लेकिन सरकार हमें साइकिल अलाउंस के लिए 50 रुपए हर महीने मिलता है।
ऐसे में इतने बडे एरिया की गश्त साइकिल से करना मुश्किल व खतरे से भरा है। हर नाका बाइक हाेनी चाहिए। शिकारियाें से सामना हाेने पर कई बार भागकर ही जान बचानी पडती है। हथियार में पिस्टल बंदूक ताे दूर डंडे तक नहीं मिलते हैं।


